छत्तीसगढ़ी हाना | छत्तीसगढ़ी लोकोक्ति छत्तीसगढ़ी व्याकरण | Chhattisgarhi Proverb

छत्तीसगढ़ी लोकोक्ति या कहावतें या हाना का अर्थ -

लोकोक्ति का अर्थ है 'लोक में प्रचलित उक्ति'। जब कोई पूरा कथन किसी प्रसंग विशेष में उद्धृत तो वह लोकोक्ति कहलाता है तथा इसी को 'कहावत' हैं। लोगों द्वारा किसी भी बात को कहने के लिए या फिर किसी भी बात या वाक्य के बदले संक्षिप्त रूप में सटीक और छोटे शब्दों का उपयोग किया जाता है तब उसे लोकोक्ति, कहावतें या हाना कहा जाता है। छत्तीसगढ़ी में कहावत और लोकोक्ति को हाना के रूप में जाना जाता है। सरल शब्दों में कहा जाए तो हाना कहावत और लोकोक्ति का छत्तीसगढ़ी मतलब है। यह कहावतें और लोकोक्तियां उस प्रांत की लोक जीवन को समझने में मदद करती है।

Chhattisgarhi Lokokti

छत्तीसगढ़ी लोकोक्ति, कहावत का वाक्य में प्रयोग -

1. आँखी कस आँखी नीहीं काजर के खइत्ता - बिनकाम के जिनिस बर खरचा (बेकाम की वस्तु के लिए खर्च)

वाक्य में प्रयोग - बिलई बाई बर कतको खरचा कर ले का फायदा, आंखी कस आंखी नींही काजर के खइत्ता ताय।

2. आघू बदरी, पाछू घाम, पानी - पानी रटे किसान - आघू बादर अउ पाछु घाम करे ले बरखा नइ होवय। (आगे - आगे बादल और पीछे - पीछे धूप निकलने पर बारिश नहीं होती)

वाक्य में प्रयोग - आज के बादर ल देखके लागथे पानी नइ गिरय तइसे काबर के आगु आगु बादर चलत हे अऊ पाछु पाछु घाम, एखरे सेती बुजरूग मन कथे, आघु बदरी पखछु घाम, पानी पानी रटे किसान।

3. आदमी-आदमी मा अन्तर, कोनों हीरा त कोनों कंकर - कोनो मनखे के सुभाव बने अउ कोनों मनखे के खराब होथे (अलग - अलग व्यक्तियों का स्वभाव अलग - अलग होता है, किसी व्यक्ति का स्वभाव अच्छा और किसी का खराब होता है)

वाक्य में प्रयोग - राजू के बड़े बेटी ह घर ल समहाले हे अऊ छोटे टूरी ह तो पढ़त हंव कहिके कांही काम नइ करय, का कहिबे आदमी आदमी मा अंतर कोनो हीरा त कोनो कंकर आय ।

4. आदर के भात खाय, बिन आदर के लात खाय - नेवताहर सगा ला सनमान मिलथे अउ बिन नेवताहर सगा ला हिनमान सहना परथे (आमंत्रित मेहमान को सम्मान मिलता है और बिना आमंत्रित मेहमान को अपमान सहना पड़ता है)

वाक्य में प्रयोग - दुसर मनके लड़ई झगरा मा कुदबे तेन आदर के भात खाय बिन आदर के लात खाय बरोबर तो आय।

5. आवन लगे बरात तब ओटन लगे कपास - बुता के सुरू होत ले बेवस्था नइ हो पाना (कार्य के प्रारंभ होते तक व्यवस्था का न हो पाना)

वाक्य में प्रयोग - चना ओन्हारी के दिन आगे हे अऊ बीज भात निमारे छिने के तइयारी नइ होय हे, इहां तो आवन लगे बरात तब ओटन लगे कपास कस हाल होगे हे। अइसने मा ओन्हारी कब होही।

6. उजड़े मड़वा मा ड़ीड़वा नाच - कोंनो काम होय के बाद मा चुसती फूरती देखाना (कोई काम खत्म होने के बाद चुस्ती और तंदुरुस्ती महसूस करना)

वाक्य में प्रयोग - धान लुवई मिजई के उजड़े मड़वा मा डीड़वा नाचे बरोबर लागथे।

7. उत्तम कुल पुलस्त के नाती जेकर घर दीया न बाती - करम बिगड़े ले उँच कुल के घलो सतियानास हो जथे (जब कर्म खराब हो तो उंचे कुल का भी सर्वनाश होना निश्चित है)

वाक्य में प्रयोग - घर मा कतको धन दोगानी राहय जादा के अतलंग करई नइ बनय, कहे घलो गेहे उत्तम कुल पुलस्त के नाती जेकर घर दीया न बाती।

8. उपास के न धास के, खाय बर ठाँस के - कोढ़िया मनखे कुछ कमा नइ सके तभो ले डपट के खाथे (आलसी व्यक्ति कोई कार्य नहीं करता फिर भी खुब खाता है)

वाक्य में प्रयोग - बिसाहू ल देखत हस गोदी खने के बेरा भाग रिहिस तेन अभी आवत हे अऊ खाए बर अघवागे, एकर सुभाव उपास के न धास के खाए बर ठांस के जइसे होगे है।

9. उरई तरी के सगा दुरिहा के नतइत - दुरिहा के नता अऊ सगा (दूर का सम्बन्धी)

वाक्य में प्रयोग - तोर बहिनी मन आ जथे रे अऊ तुमन तो आबे नई करव बेटा, अब तो तोर बहिनी मन अरई तरी के सगा होगे हे ग।

10. एक ठन आमा के सौ लबेदा - एके चीज के चलन जादा होना (किसी एक ही वस्तु का मांग अधिक होना)

वाक्य में प्रयोग - जब ले गरमी के दिन आए हे गन्ना जूस के पीअइया मन जादा होगे हे गन्ना घलो नइ पुरे परत है, त अइसने ल तो कहे गेहे एक ठन आमा के सौ लबेदा।

11. एकर लगवार मन के लाइन लगे हे - लेवइया मनके भीड़ लगना (चाहने या लेने वालों का तांता लगना)

वाक्य में प्रयोग - जबले कलिंदर ल जाए हंव तबले एकर लगवार मन के लाइन लगे हे एला कोन कोन ल देवव।

12. एक कोलिहा हुआं त जम्मो कोलिहा हुआं हुआं - बिन गुने विचारे हाँ मा हाँ मिलाना (बिना सोचे - विचारे दुसरो का समर्थन करना)

वाक्य में प्रयोग - जब जानत हव की कालू ह उतलंग बुता करथे सुभाव बने नइहे तभो ले सबो झन ओखरे सपोट करथव, एक कोलिहा हुआं त जम्मो कोलिहा हुआं हुआं करे लगथे तइसे तुमन करत हव।

13. एक झन लइका अउ गांव भर टोनहीं - जिनिस एक लेवईया जादा (एक वस्तु और उसके लेने वाले ग्राहक की तादात ज्यादा)

वाक्य में प्रयोग - कोनो काल म हमर गांव मा एक ठन बोरिंग खनाए हे तेखरो बर पानी भरईया मन तरी उपर होवत हे मरे जात हे, एकर हाल तो एक झन लइका अउ गांव भर टोनहीं कस होगे है।

14. एक तो भइरी तउनो मा बाजा बाजे - बिपत मा अउ बिपत आना (समस्या पर और समस्या आना)

वाक्य में प्रयोग - रामहू भैरा गतर के ताय चिल्लई म तोर गला बइठ जहि फेर फेर सुनय नइ, एक तो भइरी तउनो मा बाजा बाजत है।

15. एक धान के दू भूंसा - नफा उपर नफा (फायदे पर फायदा होना)

वाक्य में प्रयोग - संभू के उपर भगवान के बड़ किरपा बरसत हे, तभे तो एकर एक धान के दू भूँसा होवत हे, अइसन भाग हमन कहां पाबो रे भइया।

16. ए बहां ला चाबही त ओतके पीरा, ओ बहाँ ला चाबही त ओतके पीरा - धरमसंकट नइते असमंजस मा परना (आगे कुआं पीछे खाई, धर्मसंकट या असमंजस में पड़ना)

वाक्य में प्रयोग - मोर खेती खार सरग भरोसा हे एसो तो बरसा नइ होवत हे, खार मा फसल बोआए हे उहु भुंजावत हे, बोर खनाहू कहिके सोचत हंव पानी निकलही तभो ले करजा अऊ नइ निकलही तभो ले करजा मा बुड़हूंच, मोर हाल तो ए बहां ला चाबही त ओतके पीरा ओ बहां ला चाबही त ओतके पीरा कस होगे है।

17. कउवाँ के केहे मा टिटही ले सरग नइ रोकाय - बदमास के रिरियाए ले हिनहर मनखे जब्बर बुता ला नइ कर सके (बदमाश और नालायक लोगों के चिल्लाने से कमजोर व्यक्ति ताकतवर नहीं बन सकता और कोई बड़ा काम नहीं कर सकता)

वाक्य में प्रयोग - चोट्टा मन हा नवधा रमायन कराए बर चंदा मांगत रहय, ऐसन बदमास मनके बुध ला कोन मानहि, कउंवा के केहे मा टिटही ले सरग नइ रोकाय।

18. कंऊवा कान ल लेगे केहे म ओखर पाछु नइ दऊंडे जाय - फोकट के बात म ध्यान नइ देना चाही (अफवाह वाली बातों के पीछे नहीं जाते)

वाक्य में प्रयोग - कोरोना बेमारी के टीका लगाए ले मनखे मन मरथे ऐसन कुछ लोगन मन काहत हे, फेर ले ओखर से अइसन कांहि नई होत हे, अइसने मा कथे कि कंऊवा ल लेगे केहे म ओखर पाछू नइ दऊंडे जाय।

19. कनवा - खोरवा सदा उपाई छान्ही म चढ़ के बंदुक चलाई - कनवां - खोरवा मन बड़ उदबासी किसम के होथे (एक आंख के काने और लंगड़े यह लोग हमेशा पाती होते हैं)

वाक्य में प्रयोग - ए रोगहा खोरवा टूरा ल तो देख कतका मटमटावत हे, एक गोड़ टुटगे हे नइ हे तभो ले टेंगेर टेंगेर करत पेंड़ म कहिबे त छत म ए डाहर ले ओ डाहर इतरावत हे, तभे तो सियान मन केहे हे कनवा खोरवा सदा उपाई छान्ही म चढ़ के बंदुक चलाई।

20. कनवी आँखी मा काजर आंजे - अपन शकती के विपरीत बुता करना नइते सिंगार करना (योग्यता के विपरीत कार्य या श्रृंगार करना)

वाक्य में प्रयोग - जेन ह कभु चुलहा मा चाय तको ल नइ बनाए हे ओला गेस मा भात रांधे ला कहिबे त कनवी आंखी मा काजर आंजे कस हाल होबे करही जी।

21. करनी दिखे मरनी के बेर - मरे के बेरा मा पाप पुन के फल दिखथे (पाप और पुण्य का फल मृत्यु जब निकट होता है तब दिखता है)

वाक्य में प्रयोग - रोगहा ह अपन जवानी मा जीयत भर गांव वाले मन ला तपे हे ओखर फल तो देखाबेच करही भगवान ह नइते करनी दिखे मरनी के बेर।

22. करम के नांगर ला भूत जोतथे - अब्बड़ भाग वाला या भागमानी होना (बहुत भाग्यशाली होना)

वाक्य में प्रयोग - देख ले राजू के टुरा जनम के कोढ़िहा तभी ले ओखर घर ल देखबे ता कोनो महल ले कम नइ हे, अतका चीज बस कहां ले आथे इखर करा, जेकर करम के नांगर ला भूत जोतथे उखर कोनो कांही नइ बिगाड़ सकय।

23. करू होथे तइसे जादा मयाँ गरू होथे - जादा मया दुलार दुख नइते बिपत के कारन भी बन सकथे (कभी - कभी अत्यधिक प्रेम और लगाव मुसीबत का कारण भी बन जाता है)

वाक्य में प्रयोग - अपन लोग लइका मन ला जादा मया अउ दुलार मा नइ रखना चाही बाद मा पसताए ल घलो पड़ सकत हे, करू होथे तइसे जादा मया गरू होथे।

24. कहाँ गे रेहे कहूँ नीहीं का लाने कुछु नीहीं - निफल अउ कोनो काम के नई होना (कड़ी मेहनत के बाद भी असफल होना)

वाक्य में प्रयोग - संतु ह ओतका महिनत अउ रूपिया पइसा खरचा करके अपन टूरी टूरा मन ला शहर मा पढ़ाइस तेकर कुछु हांसिल नइ होइस, कहां गे रेहे कहुं नीही का लाने कुछु नीहिं कस किस्सा होगे।

25. काम ले करम, दान ले धरम - काम बुता करे ले भाग सुधरथे अउ दान करे ले पुन मिलथे (कड़ी मेहनत करने से भाग्य सुधरता है और पुण्य पुण्य मिलता है दान करने से)

वाक्य में प्रयोग - मन लगा के काम करबे त पथरा मा घलो पानी ओगार सकथस समारूू, काम करे ले करम अउ दान करे ले धरम होथे।

26. कारी हे ते का भइस, मुंहरन हा धारी हे - संवरेंगी हवय तभो ले सुग्घर हवय (भले ही सांवली हो लेकिन सुंदर दिखना)

वाक्य में प्रयोग - भैरा के बहुरिया ह करिया भले हे फेर बड़ सुग्घर दिखथे जी, कारी हे त का भइस मुंहरन हा हे।

27. का हरदी के रंग, का परदेसी के संग - थोड़कुन समे बर सुख (थोड़े समय या अल्पकालीन समय के लिए सख का मिलना)

वाक्य में प्रयोग - सहर उहर जाबे चार दिन रहिबे खाबे पीबे तेन हा का हरदी के रंग का परदेसी के संग असन तो आय। बाद मा जुच्छा के जुच्छा।

28. कुकुर के रइ आय त छान्हीं म चढ़ के मरे - आफत मा जानबूच के परना (जानते हुए या जानबूझकर खतरा मोल लेना)

वाक्य में प्रयोग - जब बड़ बड़ दुख के पहाड़ गिरथे मनखे उपर त दिमाक घलो काम नइ करे चेत हरा जाथे अउ हालत ह कुकुर के रइ आय त छान्ही म चढ़ के मरे कस हो जाथे।

29. कोस - कोस मा पानी बदले, दु चार कोस मा बानी - थोक थोक कन दुरिहा मा घलो पानी अउ भाखा में फरक आय ल धर लेथे (दो चार कोस की दूरी पर पानी और भाषा में अंतर आना जायज है)

वाक्य में प्रयोग - जम्मो जगहा के भाखा एक सरि नइ होवय अऊ जम्मो जगहा के पानी के सवाद घलो एक सरि नइ होवय सब मा थोड़ थोड़ अंतर रहिबे करथे, तभे तो कथे घलो कोस कोस मा पानी बदले दु चार कोस मा बानी।

30. खड़ा मंजूरी चोखा दाम - नगदी के सउदा (नगद का लेन देन या सौदा)

वाक्य में प्रयोग - आज कल के धंधा पानी हा रे समारू उधारी बाढ़ि मा नइ चलय खड़ा मंजूरी चोखा दाम मा चलथे।

31. खाई मीठ त माईं मीठ - जउन हा फायदा कराथे बड़ मयारुक होथे (जो आपका फायदा कराता है वही आपको प्यारा लगता है)

वाक्य में प्रयोग - ए टूरा हा मर मर के एकेल्ला घर के सबे बुता ला करथे, एखर गुन ला गाबे करही खाई मीठ त माई मीठ खाय ले।

32. खुरुर - खारर करे किसान जिही अघवागे तिही सियान जेन किसान समे ले पहली बुता कर लेथे बड़ चतुरा कहलाथे (समय से पहले जो किसान या व्यक्ति अपना काम पूरा कर लेता है वह चतुर व्यक्ति कहलाता है)

वाक्य में प्रयोग - हमर गांव के तिलक हा चेतलगहा किसान किसान आवय तेखर सेती हर साल बने फसल होथे कथे घलो ना के खुरूर खारर करे किसान जिही अघवागे तिही सियान।

33. खेती धन के नास जब खेले गोसइयाँ तास - जुआं तास खेले ले धन संपत्ति सबो के नास हो थे (जुआ खेलने से धन संपत्ति और व्यवसाय सभी का नाश हो जाता है)

वाक्य में प्रयोग - हमर गांव के गौंटिया टेटकू ओतका बड़े आदमी तेन हा तास खेलइ मा बरबाद होगे, खेती खार सबो बेंचागे, इही ला किथे खेती धन के नास जब खेले गोसइयां तास।

34. गठरी मा दाम नीहीं बरमत के नाँव - अपन संउख ला बिन पइसा के पुरा नइ करे जा सकय (पैसों के बिना अपनी इच्छाओं की पूर्ति नहीं कर सकते है)

वाक्य में प्रयोग - खेदू के टुरा आंसो टेक्टर लेवइया हे कहिके सुनई आवत हे, जबके ओखर घर गठरी मा दाम नीहीं बरमत के नांव।

35. घर मा नाँग देवता भिंभोरा पूजे ला जाय - अपन नजीदीक के साधन अऊ मनखे ला छोंड़ के दुसर डाहन उपाय खोजना (अपने नजदीक में उपलब्ध व्यक्ति या साधन को छोड़कर बाहर तलाश करना)

वाक्य में प्रयोग - सरदी धरे हवय कहिके मुड़ धर के रोवत हस अऊ गांव भर मा सुजी लगइया खोजत हस, घर मा दुद हे हरदी डाल डबका अऊ गटक जा, घर मा नांग देवता भिंभोरा पुजे ला जाय।

36. चलनी मा गाय दुहय, करम ला देवय दोस - गलती करय खुद अऊ दोस देवय करम ला (स्वयं की गलती का दोष अपने कर्म को देना)

वाक्य में प्रयोग - राम्हु धान ला बो के तास जुआ खेलय नीदे कोड़े नही, अऊ जब धान लुए के दिन आइस त धान एको कन नई होईस अऊ काहत हे करम खराब मोर तो, तभे ऐसने मन बर केहे ग हे चलनी मा गाय दुहय करम ल देवय दोस।

37. जबके आमा तबके लबेदा - जभे समे आथे तभे कोनो जिनिस ला खोजना (किसी वस्तु की तलाश उसके समय आने पर करना)

वाक्य में प्रयोग - अभी लईका मन हा इसकुल जाए के लइक होए नइ हे अऊ बिहाव बर खरचा के चिंता करे ला धर ले हस समारू अभी समे हे, जब के आमा तब के लबेदा उही समे सोंचबे।

38. जियत बाप संग दंगी दंगा मरे बाप ला लेगे गंगा - बाप बेटा मा बने के देखावा अऊ ढोंग करना (बाप बेटे में अच्छे रिश्ते का ढोंग करना)

वाक्य में प्रयोग - बाप बेटा दूनो के हरहर कटकट के मारे प भर हा हलाकान होगे रेहेन तेन ला देख डोकरा मरगे ता गया जी लेगे बर हाड़ा बीनत हे, जियत बाप संग दंगी दंगा मरे बाप ला लेगे गंगा अइसने ला कथे।

39. टठिया न लोटिया फोकट के गौंटिया - रहिसी के देखावा बघारना (अपनी दौलत का झूठी शान दिखाना)

वाक्य में प्रयोग - सांतु के घर मा टठिया न लोटिया फोकट के गौंटिया कस किस्सा हे तभो लो लपरही गोठ न गेहे, आनी बानी के गोठियावत रथे।

40. टेटका के पहिचान बारी तक - चिन पहिचान कम होना थोरिक चिनहारी (पहचान का सीमित होना)

वाक्य में प्रयोग - सहर मा खाए कमाए ला जाबे ता सुरू सुरू मा सहर बर टेटका के पहिचान बारी तक होथे।

41. तइहा के बात ला बइहा लेगे - अब्बड़ दिन के जुन्ना बात होना (बहुत पुरानी बात का होना)

वाक्य में प्रयोग - तइहा के बात बइहा लेगे रे सुकालु हमर जमाना मा दस पइसा मा झोला भर साग भाजी मिलय अब तो पांच सौ मा नइ होवय।

42. तेंदू के अंगरा बरे के ना बुताय के - अतलंगहा मनके मन ना खुद चैन से राहय ना दुसरो ला राहन देवय (दुष्ट किस्म का व्यक्ति न स्वयं चैन से रहते हैं और न दूसरों को शांति से रहने देते हैं)

वाक्य में प्रयोग - अइसना लईका भगवान हा कोनो ला झन देवय जऊन हा तेंदु के अंगरा बरे के ना बुताय के असन हरे।

43. थूके थूक मा बरा नइ चुरय - काम बुता हा फोकट मा नइ होवय (कामकाज मुफ्त में नहीं होता मेहनत करना पड़ता है)

वाक्य में प्रयोग - बर बिहाब करे बर बड़ खरचा लागथे अऊ बिकट पइसा घलो सकेले बर लागथे रे चमरू थूके थूक मा बरा नइ चुरय।

44. दहरा मा मछरी अऊ भांठा मा मोल - देख परख के कोनो जिनिस ला बिसाना चाही (सोच समझ और जांच कर किसी वस्तु को खरीदना चाहिए)

वाक्य में प्रयोग - डोमार के टुरा हा घर मा बिना सुनता सुलाह के फटफटी बिसा के लाय हे, अब घर के मन हा दहरा मा मछरी अऊ भांठा मा मोल करत हे, बस होगे ना अब।

45. दुब्बर बर दू असाड़ - दुहरी विपत्ति के मार परना (पहले से कष्ट और ऊपर से दूसरा संकट आना)

वाक्य में प्रयोग - अंकाल दुकाल के दिन मा थोर बहुत चना गंहू होए हे ओखरो कोनों पुछ पुछंतर नइ हे। अइसने मा किसान मनखे मरही नइते का करही दुब्बर बर दु असाड़ कस हाल होगे हमर।

46. गाँव मा घर न खार मा खेत - एको पतरी खेती खार न होना (बिल्कुल ही भूमिहिन होना)

वाक्य में प्रयोग - डमरू ला तो देख कतका करजा बोड़ी करत हे जांगर के ऊपर मा अऊ एको पतरी जगहा नइ हे इही ला तो किथे गांवक्षमा घर न खार मा खेत।

47. नवां बइला के नवाँ सींग चल रे बइला टींगे - टींग - नवा - नवा मनखे मनके बिकट लुहलुहाई (नए नए व्यक्तियों का अधिक उत्साह एवं प्रसन्नता में होना)

वाक्य में प्रयोग - अभी नवा नवा बिहाव होय हे तेखर सेती टुरा मटमटावत हे थोकन जुन्नाही ताहन पुछय घलो नइ तभे तो कहिथे नवां बइला के नवां सींग चल रे बइला टींगे टींग।

48. पर भरोसा तिन परोसा - दुसर के धन ला उड़ाय मा अखरदानी नइ होय (दूसरों के धन दौलत को उड़ाने में कोई दुख और दर्द नहीं होता)

वाक्य में प्रयोग - संतु के टुरा ला देख मंद मउहा मा सब पुरखा के जायदाद ला खरच डारिस पर भरोसा तिन परोसा ताए खुद कमाय रहितिस ता जानतिस।

49. परोसी के मारे ले साँप नइ मरय - दूसर के भरोसा मा बुता काम नइ होय (दूसरों के भरोसे पर कामकाज नहीं होता खुद भी करना पड़ता है)

वाक्य में प्रयोग - गली गली गिंजरे मा खेती खार चेत लगाए ला लगथे परोसी के मारे ले सांप नइ मरय।

50. पाप हा छान्हीं चढ़ के नाचथे - पाप उतलंग बुता कभू नइ लुकाए सके (पाप कितना भी छुपा लो नहीं छुपता)

वाक्य में प्रयोग - जादा उतलंगबाजी करइ सोभहा नइ देवय भगवान एखर फल एक दिन देखाबे करथे जब पाप हा छान्ही चढ़के नाचथे।

51. हाय केहे ले परान नइ छुटे - अपन मनके मांगे ले नइ मरस (अपनी इच्छा से मृत्यु नहीं हो सकती)
वाक्य में प्रयोग - जब तक जियत रहिबे तब तक का
म बुता करे ला परही जांगर के टुटत ले, हाय केहे ले परान नइ छूटे।

52. पेट भरे ना पुरखा तरे - जरूरत ले बहुतें कमती मिलना (पूर्ति के हिसाब से बहुत कम का होना)

वाक्य में प्रयोग - एक दरजन मनखे अऊ चार ठन समोसा लाए हस के झन खाही एला पेट भरही न पुरखा तरही तइसे कस किस्सा होगे हे।

53. फोकट के पाय मरत ले खाय - अपखया अपने भर ला जादा सोचना (स्वार्थी किस्म का होना)

वाक्य में प्रयोग - कभू कभू बने बने जिनिस ला ले बर घलो अखरथे अऊ ओला देख कतका खरचा करत हे, फोकट के पाय मरत ले खाय।

54. बेंदरा का जाने अदरक के सेवाद - जेन चींज ला करे नइ हे ओखर मरहम ला कइसे जानही (जो चीज से संबंध नहीं उसे कोई नही समझ सकते)

वाक्य में प्रयोग - समारू आए गांव के रहइया सहर गिस खाए कमाए बर, उंहा मिलिस काम मिच्चर मशीन चलाए के चालू करय होबे न करय त एक झन आइस अऊ एके झटका मा चालू करके रेंग दिस, तहां समारू अपने आप ला मने मन कहे लागिस बेंदरा का जाने अदरक के सवाद।

55. बिहिनिया के झगरा संझा के पानी - बिहनिया के झगरा हा अऊ सांझ कन के बरसा हा जल्दी नइ माड़य (सुबह का वाद विवाद और शाम की बारिश जल्दी नहीं रुकती देर तक चलती रहती है)

वाक्य में प्रयोग - आज तो संझाती संझाती बादर चढ़त हे लगथे बिकट पानी गिरही तइसे सियान मन घलो केहे हे बिहिनिया के झगरा अउ संझा के पानी जल्दी नइ रूके।

56. भंइस बड़े के अक्कल - ताकत ले अक्कल बड़े होथे (ताकत और बाहुबल से बुद्धि श्रेष्ठ होती है)

वाक्य में प्रयोग - गांव भर मिलके सटके टेकटर ला नइ निकाल सकिन फेर फेरू के अक्कल के बताए ले एके झटका मा निकलगे तभे तो कथे भंइस बड़े के अक्कल।

57. मोरे बिलई मोरे से मियाऊं - जेखरे खाबे साथ रहिबे ओखरे संग बहेस करना (जिसकी खाते हैं जिसके यहां रहते हैं उसी के साथ बहस करना)

वाक्य में प्रयोग - रामू ह कोदु घर राहय ओखरे घर खाय कमाए अऊ कांही कहितिस ताहन कोदुच बर खिसिया जाए, तहां रामू कहिथे मोरे बिलई मोरे से मियाऊं।

58. मानबे ते देवता नइ मानबे ते पथरा - मूरत पूजा मा बिसवास करना (मूर्ति पूजा में विश्वास करना)

वाक्य में प्रयोग - रोज दिन पूजा पाठ करबे ता बिसवास करे ला लागहीच ए मन हा बिसवास के चीज हरय मानबे ते देवता नइ मानबे ते पथरा।

59. मानबे ते देवता नइ मानबे ते पथरा - मूरत पूजा मा बिसवास करना (मूर्ति पूजा में विश्वास करना)

वाक्य में प्रयोग - रोज दिन पूजा पाठ करबे ता बिसवास करे ला लागहीच ए मन हा बिसवास के चीज हरय मानबे ते देवता नइ मानबे ते पथरा।

60. मरे के ना मोटाय के - जइसने के तइसने रहना (जस का तस यथावत रहना)

वाक्य में प्रयोग - जब ले नवा बइला ला बिसा के लाय हंव तब के ओतके पन हे कतको जतन करत हंव तभो ले मरे के ना मोटाय के।

61. मरहा ला मारे सजोरहा के पाँव लागे - समे देख के बुता निकालना (समय हिसाब काम / अवसरवादी होना)

वाक्य में प्रयोग - आज कल के नेता मन के आदत ला देख मरहा ला मारथे अऊ सजोरहा के पांव लागथे तभे गरीब मनके तरक्की नइ होवत हे।

62. रात भर रमायन पढ़िस बिहिनिया पुछिस राम सीता कोन त भाई बहिनी - जऊन काम ल दिन रात मेहनत करके सीखिन बाद में उही ल भुलागे (जिस उद्देश्य से काम किया गया था उसका मुख्य उद्देश्य ही भूल गए)

वाक्य में प्रयोग - हरमू ह रात दिन एक करके पढ़ई करिस अउ पेपर देवाय ल गिस त सबो ल भुलागे तभे कहे गे हे रात भर रमायन पढ़िस बिहिनिया पुछिस राम सीता कोन त भाई बहिनी।

63. लबरा के खाय तभे पतियाय - झुठ लबरा मनखे मनके बिसवांस काम बुता हा पुरा होय तभे करे (झूठे व्यक्तियों पर विश्वास जब तक कार्य पूरा ना हो तब तक नहीं करना चाहिए)

वाक्य में प्रयोग - कतको ठन काम के ठेका ले हवय कोन ला करथे अऊ कोन ला नइ करय लबरा के खाय तभे पतियाय।

64. लात के देवता बात मा नइ मानय - अतलंगहा मनखे मन नइ सुधरय तभे सुधरथे जभे सजा मिलथे (धूर्त और दुष्ट व्यक्ति जब तक दंड नहीं मिलता तब तक नहीं सुधरता है)

वाक्य में प्रयोग - लाला के टूरा बड़ उदबास लइका ताए नंगत के समझाथे ओखर ददा तभो ले नइ सुधरत हे, लात के देवता बात मा नइ मानय ठठाए मा सुधरही।

65. संझा खेती बिहिनियाँ गाय नइ झाँकही तेकरे जाय - वो मनखे ला नकसानी उठाना पड़थे जेन हा लापरवाही करथे (लापरवाह व्यक्ति को अक्सर हानि उठाना पड़ता है)

वाक्य में प्रयोग - जम्मो चना ला किरा मन हा चपट कर डारिस ता सुध करत हस संझा के खेती बिहनिया गाय नइ झांकही तेकरे जाय, होय हुवाय मा चना ला बुडो डारे।

66. सगा देखे ले मयां - पर मनखे के खाना अउ पर मनखे के परेम देखे म सब ल बने लगथे (दूसरों का भोजन और दूसरों का प्रेम सभी को देखने अच्छा लगता है)

वाक्य में प्रयोग - रामू के टुरा ह सगच तो आय, एक दिन रूके ला कहिबे ता चार दिन ले रूक जाही एखरे सेती सियान मन कथे घलो खाय ले सगा दखे ले मया।

67. सूने चार के करे मन के - खुद ले निरनय करना (स्वयं के द्वारा निर्णय लेना)

वाक्य में प्रयोग - बड़े बड़े काम बुता करे बर चार सियान के सुनना चाही फेर अपन मनके करना चाही, सुने चार के करय मन के।

68. सटर पटर के घानी आधा तेल आधा पानी - लकर धकर करबे ता बुता काम नइ बने (ज्यादा जल्दबाजी करना मतलब काम का सही से नहीं होना)

वाक्य में प्रयोग - घेरी बेरी पानी गिरई के मारे घर के ढलई काम सटर पटर के घानी आधा तेल आधा पानी कस होगे हमर तो।

69. हंडिया के मुहूँ मा परई ढाँकबे मनखे के मुहूँ मा काला ढांकबे - सबके समझ एक जइसे नइ रहय (सबकी समझ एक जैसी नही होती है सब की अलग अलग होती है)

वाक्य में प्रयोग - अपन अपन सुवारथ बर मनखे मन हा कुछु भी करत रहिथे, उंखर कोती कतेक ला धियान देबे, हंडिया के मुहू मा परई ला ढ़ांकबे ता मनखे के मुहूं मा कालक ढ़ांकबे।

70. हांथी बुलक गे पुछी लटक गे - बड़नक बुता होगे अऊ नानकुन बुता ह अरहज गे (बड़ा काम पूरा हो चुका है और छोटा सा काम में रुकावट आ गया)

वाक्य में प्रयोग - कोदु अपन खेत म कुआं खनत रहे अब आखरी पुरे के बेरा आइस त पखरा निकलगे अब का करबे सबे महिनत मा पगनी फेरागे हांथी बुलकगे अउ पुछी लटकगे वाले बुता होगे।

71. हरहा संग कपिला बिनास - गलत बुता करइया के संगत नास के कारन बनथे (पापी और दूसरे व्यक्तियों का संगत नाश का कारण बन सकता है)

वाक्य में प्रयोग - जनकू नानपन के चोट्टा ओखर संगत मा पड़ के पंचू असन सिधवा लइका घलो बिगड़गे, हरहा संग कपिला बिनास होगे।

72. हाँत मइल न गोड़ मइल - सुख सुविधा ले परिपूर्ण होना (सुख पूर्वक सभी कामों का निपटना / पूर्ण का होना)

वाक्य में प्रयोग - नउकरी करे बर मनखे मन अपन पुरखौती - काम धंधा ला घलो छोंड़त हे आजकल काबर के नउकरी मा हांत मइल न गोड़ मइल।

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