छत्तीसगढ़ में सिंचाई (Chhattisgarh me Sinchai) के साधन में नहरे प्रमुख है, यहाँ
की नहरों में महानदी व तंदुला नहरे प्रमुख हैं। छत्तीसगढ की प्रमुख फसल धान है,
जिसके लिए अधिक पानी की अवश्यकता होती है। महानदी तथा तंदुला नहर प्रणालियों
द्वारा रायपुर, धमतरी, बलौदाबाजार, दुर्ग तथा बालोद तहसील में बड़े पैमाने पर
सिंचाई होती है। जशपुर समरी पाट प्रदेश में भी नहरों द्वारा सिचाई होती है
दंडकारण्य में नहरें सिंचित करती है। राज्य का सर्वाधिक सिंचित जिला
जांजगीर-चांपा व रायपुर है जबकि न्यूनतम सिंचित जिले नारायणपुर एवं दंतेवाड़ा है।
सिंचाई की न्यूनतम सुविधा के स्तर पर दंतेवाड़ा जिला आता है।
राज्य गठन के समय प्रदेश में निर्मित 03 वृहद, 29 मध्यम एवं 1,945 लघु सिंचाई योजनाओं से कुल 13.28 लाख हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता सृजित थी, जो वर्तमान में (मार्च 2023 तक) 21.52 लाख हेक्टेयर हो गई है। इस तरह राज्य निर्माण के पश्चात कुल 8.24 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता की वृद्धि हुई। वर्तमान में प्रदेश की सिंचाई का प्रतिशत 38.84 हो गया है। आगामी वर्षों में राज्य के कुल बोये गए क्षेत्र का 75 प्रतिशत अर्थात 43 लाख हेक्टयर में से 32 लाख हेक्टयर क्षेत्र में सतही जल से सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है।
छत्तीसगढ़ में सिंचाई के प्रमुख संसाधन
1. नहर - छत्तीसगढ़ में शुद्ध सिंचित क्षेत्र का लगभग 56.05%
क्षेत्र नहरों द्वारा सिंचित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य में कुल 8,99,242
हेक्टयेर क्षेत्रफल की सिंचाई नहरों द्वारा होती है। राज्य के मैदानी भाग के
लगभग सभी जिलों में सिंचाई का प्रमुख साधन नहरे हैं। नहर से सर्वाधिक सिंचाई
जांजगीर-चांपा में होती है। बिलासपुर के अतिरिक्त धमतरी, रायपुर व दुर्ग में भी
नहरों द्वारा सिंचाई होती है। राज्य के मैदानी भाग के लगभग सभी जिलों में
सिंचाई का प्रमुख साधन नहरे हैं। नहर से सर्वाधिक सिंचाई जांजगीर-चांपा, धमतरी
में होती है। जांजगीर-चांपा, धमतरी के अतिरिक्त बिलासपुर, रायपुर व दुर्ग में
भी नहरों द्वारा सिंचाई होती है।
2. तालाब - छत्तीसगढ़ के मात्र 1.53% क्षेत्र पर तालाबों से सिंचाई
की जाती है, प्राचीन काल से ही यहाँ तालाबों से सिंचाई की जाती है। इससे
सर्वाधिक सिंचाई जशपुर जिले में एवं बस्तर संभाग में होती है। छत्तीसगढ़ में
तालाब से सिंचाई कुल 24,675 हेक्टयेर में होती है।
3. कुंआ - छत्तीसगढ़ में 0.73% क्षेत्र की सिंचाई कुंओ द्वारा होती
है। राज्य में कुल 11,826 हेक्टेयर क्षेत्र पर कुंओ द्वारा सिंचाई की जाती
है। इससे सर्वाधिक सिंचाई दंडकारण्य क्षेत्रो में तथा दंतेवाड़ा जिले में होती
है।
4. नलकूप - छत्तीसगढ़ के कृषि क्षेत्र के 41.67% क्षेत्रो पर
नलकूपों द्वारा सिंचाई की जाती है। इससे सर्वाधिक सिंचाई रायगढ़ जिले में होती
है। छत्तीसगढ़ राज्य में कुल 6,68,558 हेक्टयेर क्षेत्रफल की सिंचाई नलकूपों
द्वारा होती है।
छत्तीसगढ़ में सिंचाई परियोजना
महानदी परियोजना (1980)
यह छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना है। इस परियोजना से धमतरी रायपुर व
दुर्ग जिले में सिंचाई सुविधा उपलब्ध है महानदी जलाशय परियोजना के अंतर्गत 6
जलाशय एवं महानदी पोषक नहर और सोंढूर पोषक नहर सम्मिलित है महानदी जलाशय
परियोजना में मुरूमसिल्ली (1923), दुधावा (1963), रविशंकर जलाशय / गंगरेल बांध
(1978) सिकासर (1979), सोंढूर (1988), एवं पैरी हाईडेम सम्मिलित है।
1. रुद्री पिक अप वियर
जल संसाधन विभाग के अनुसार इसकी स्थापना 1915 में की गई। यह महानदी पर
निर्मित है। यह प्रदेश की पहली निर्मित परियोजना है। 1993 में रुद्री पिक-अप
वियर का स्थान रुद्री बैराज ने लिया। ब्रिटिश शासन काल के दौरान रुद्री में
महानदी पर बैराज का निर्माण किया गया था। यहां ब्रिटिश कालीन तकनीक और
स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना देखा जा सकता है।
बड़े-बड़े पत्थरों को एक आकार में काटकर इनकी जोड़ाई चूने से की गई थी, जो अब
मजबूत स्थिति में है, लेकिन रुद्री बैराज चार जिलों की जीवन रेखा है। इनमें
धमतरी जिले के साथ बालोद, रायपुर, बलौदाबाजार जिले शामिल हैं। इस बैराज से
महानदी मुख्य नहर के जरिए 6 लाख 60 हजार एकड़ खेतों की फसलों को सिंचाई सुविधा
मिल रही है। साथ ही सैकड़ों गांवों और रायपुर-धमतरी शहर के लोगों को पेयजल व
निस्तारी सुविधा उपलब्ध हो रही है। फसलों की सिंचाई के लिए बैराज से 116 किमी
लंबी मुख्य नहर बनाई गई है।
2. मॉडमसिल्ली या मुरूमसिल्ली
इसकी स्थापना 1914 और 1923 के बीच हुई। यह जलाशय सिलियारी नदी पर स्थित है।
इस जलाशय का निर्माण एलफिस्टन द्वारा की गई थी तथा यह एशिया का पहला सायफन
बांध है।
नोट - हाल ही में प्रदेश सरकार ने इस
जलाशय का नाम परिवर्तन कर बाबू छोटे लाल श्रीवास्तव के नाम पर रखने की घोषणा
की है।
3. दुधावा जलाशय
दुधावा जलशय कांकेर जिला में स्थित है। इसकी स्थापना 1962 में की गई थी। यह
भी महानदी पर निर्मित है। स्वत्रंता प्राप्ति के पश्चात यह राज्य का पहला
बांध है। बांध का निर्माण 1953 ई. में शुरू हुआ और 1963 ई. में समाप्त हुआ।
इस बांध की ऊंचाई 24.53 मीटर और लंबाई 2906.43 मीटर है। दुधवा बांध, सिहावा
पर्वत से 21 किमी और कांकेर से 30 किमी दूर स्थित दुधवा गांव में महानदी नदी
पर बनाया गया है।
4. गंगरेल बांध | रविशंकर जलाशय
इसकी स्थापना 1978 में की गई है। यह महानदी पर निर्मित है। यह राज्य का सबसे
लम्बा बांध है, जिसकी कुल ऊंचाई - 1365 मीटर है। गंगरेल बांध में कुल 14 गेट
है। यहाँ 10 मेगावाट जल विद्युत परियोजना संचालित है। इस जलाशय से भिलाई
स्टील प्लांट को जलापूर्ति की जाती है।
महानदी कॉम्प्लेक्स
महानदी कॉम्प्लेक्स इसकी स्थापना 1980-81 में विश्व बैंक की सहायता से की गई
थी। इसके तहत पैरी नदी पर सिकासार बांध (गरियाबंद) व सोंढूर नदी पर सोंढूर
बांध (गरियाबंद) बनाया गया है।
5. हसदेव बांगो | मिनीमाता परियोजना
मिनीमाता परियोजना की स्थापना 1967 में की गई है। यह प्रदेश की पहली बहुउद्देशीय परियोजना है। यह परियोजना हसदेव नदी पर निर्मित है। इस बांध से एनटीपीसी एवं बाल्को को जल की आपूर्ति की जाती है। यह बांध पर माचाडोली नामक स्थान पर (40×3) 120 मेगावाट जल विद्युत परियोजना संचालित है जो प्रदेश की सबसे बड़ी जल विद्युत परियोजना है। इस परियोजना से कटघोरा जांजगीर तथा सक्ती तहसीलो की लगभग 2,50,300 हेक्टेयर तथा रायगढ़ जिले में 4700 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी इस परियोजना के तीन चरणों में से दो चरण पूरे हो गए हैं।6. पैरी परियोजना
यह परियोजना गरियाबंद जिले में स्थित है इस परियोजना में पैरी नदी पर सिकासार गांव में सीकासार बांध तथा 35 किलोमीटर नीचे की ओर नदी पर कुकदा पिक-अप वियर का निर्माण सम्मिलित कुकदा वियर से दाईं तट नहर 27.37 किलोमीटर बाई तत नहर 25.76 किलोमीटर तथा उनकी शाखाएं 165.83 किलोमीटर व 135.34 किलोमीटर प्रस्तावित है।7. केलो | दिलीप सिंह जूदेव परियोजना
यह प्रदेश की नवीन परियोजना है, इसे 2014-15 में प्रारंभ किया गया है। यह
परियोजना केलो नदी पर स्थित है।
8. कोडार | वीरनारायण सिंह परियोजना
यह परियोजना रायपुर जिले के कोबाझार के समीप महानदी के सहायक कोडार नदी पर स्थित है इस परियोजना के अंतर्गत 2360 मीटर लंबा 23.32 मीटर ऊंचा बांध निर्माणधीन है इस परियोजना से 16760 हेक्टेयर (खरीफ) एवं 6720 हेक्टेयर (रबी) की भूमि सिंची जा सकेंगी ।9. जोंक परियोजना
यह परियोजना महानदी की सहायक जोंक नदी पर स्थित है इस पर 606 मीटर लंबा और 7.7 मीटर ऊंचा नान आवर फ्लाई बांध बनाया जायेगा इससे बाई मुख्य नगर 72 किलोमीटर लंबी और शाखा नहरे 82 किलोमीटर निकल जाएगी इस परियोजना का कार्य 1973 में प्रारंभ हुआ था।10. खारंग परियोजना
11. खुड़िया बांध | राजीव गांधी परियोजना
इस जलाशय का निर्माण तीन प्राकृतिक पहाड़ियों को जोड़कर किया गया है। इन तीनों
पहाड़ियो के मध्य से होकर मनियारी नदी बहती है। अंग्रेजी शासन काल में कृषि की
संभावनाओं को देखते हुये इन तीन पहाड़ियों को जोड़कर बांध बनाने की प्रक्रिया
1927 मे शुरू हुयी, जो तीन साल बाद 1930 मे पूरी हुई बाद मे इसका नाम राजीव
गांधी जलाशय कर दिया गया। खुड़िया ग्राम मे यह बांध निर्मित होने के कारण यह
बांध खुड़िया जलाशय के नाम से भी जाना जाता है। मुंगेली, लोरमी एवं ब्लॉक के
किसान कृषि के लिए मुख्यतः राजीव गांधी जलाशय पर ही आश्रित है। खुड़िया बांध
छत्तीसगढ़ में मुंगेली जिले के लोरमी विकासखण्ड में स्थित है।
खुड़िया जलाशय मुंगेली से तकरीबन 45 किलोमीटर दूर है। यह एक रमणीय स्थल है जो
चारो ओर से वनाच्छाादित है तथा इसके उत्तर पश्चिम दिशा में पर्वत श्रृखला है।
यह बांध मनियारी नदी पर अंग्रेजो के शासनकाल में तैयार की गई है तथा यहां पर
रेस्ट हाउस भी उपलब्ध है। यहां जाने के लिए हम छत्तीसगढ के राजधानी रायपुर से
सीधे बस के माध्यम से जा सकते है। निकटतम रेलवे स्टेशन कोटा व बिलासपुर हैं।
बाँध के दक्षिण भाग से एक नहर निकलता है, जो पूरे लोरमी क्षेत्र को सिंचित
करता है आज के दिनों में वो अपने में बहोत बडा उपलब्धि है। यह प्राकृतिक
सौन्दर्य का अपार खजाना है। बांध के पूर्वी भाग में थोड़ी उचाई में रेस्ट
हॉउस है, जिसमे दार्शनिक बड़े आनंद के साथ मनोरंजन करते है। उसके नीचे में
खुडिया की पूरी बस्ती बसी है।
12. भैंसाझार परियोजना
13. खूंटाघाट जलाशय | संजय गांधी परियोजना
इस परियोजना की स्थापना 1920-31 के बीच की गई है। यह जलाशय बिलासपुर जिले के
रतनपुर में अरपा नदी की सहायक नदी खारंग नदी पर स्थित है। इसकी सिंचाई क्षमता
8300 हेक्टेयर है।
14. तांदुला परियोजना
तांदुला परियोजना की स्थापना 1913 में हुई थी यह छत्तीसगढ़ की प्रथम परियोजना
है। यह परियोजना तांदुला नदी पर निर्मित है। इसकी सिंचाई क्षमता 0.87 लाख
हेक्टेयर है। इस बांध से भिलाई स्टील प्लांट को जल की आपूर्ति की जाती है।
तांदुला कॉम्प्लेक्स - तांदुला कॉम्प्लेक्स के तहत 1956 में
जुहार नदी पर गोंदली जलाशय व 1967 में खरखरा नदी पर खरखरा जलाशय का निर्माण
किया गया एवं तांदुला नदी में तांदुला जलाशय का निमार्ण किया गया।
15. बोधघाट परियोजना
विशेष - परियोजना के निर्माण से 28 गांव
पूर्णरूप से एवं 14 गांव आंशिक रूप से डुबान क्षेत्र में आएंगे। 1975-79 में
तात्कालिन मध्यप्रदेश एवं ओड़िशा राज्य के बीच इंद्रावती जल बटवारे के तहत इस
परियोजना को हरी झण्डी मिली थी किन्तु वन संरक्षण अधिनियम - 1980 लागू होने के
बाद, पर्यावरण मंत्रालय से पुनः अनुमति 1985 में मिल पाई।
1 Comments
its beautiful
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