अइसन सब्द मन अलंकार-बिधान मा बड़ उपयोगी होथे। सायद एकर सेती जादा-ले-जादा अनेकार्थक सब्द वाले भाखा ला जादा सजोर भाखा माने जाथे। छत्तिसगढी मा अनेकार्थक सब्द के संखिया अब्बड़कन हवय। कुछ जादा परचलित सब्द मन के सूची अइसन ढंग ले हवय।
छत्तीसगढ़ी अनेकार्थी शब्द के उदहारन -
1. अँटाना - कमती होना (घटना), अइँठ चघना (ऐंठन चड़ना), उरक जाना (समाप्त होना), झुक्खा होना (खाली होना)
2. अँटियाना - अँइठना (ऐंठना), गुमान करना (घमंड करना), अंगरई लेना (अंगड़ाई लेना), तरफना (तड़पना)
3. अंडबंड बड़बड़ई - (व्यर्थ प्रलाप), गारी - गल्ला (गाली गलौच), टेड़गा - पेचका (टढ़ा - मेढ़ा), उल्टा - सीधा (यथावत)
4. अदर - कचर - बिना सुवाद के (स्वादहीन), अधचुरहा (अधपका), जतर - कतर (अस्त - व्यस्त)
5. अपसोसी - सुवारथी (स्वार्थी), पेटमाँहदुर (अधिक खानेवाला), कोनो जिनिस ला जादा ले जादा धरे के उदिम करइया (किसी वस्तु को अधिक से अधिक प्राप्त करने का प्रयास करनेवाला)
6. अभरना - संघरना ( मिलना), मुलाकात करना या होना (भेंट होना), छुआना (स्पर्ष होना), गड़ना (चुभना)
7. अमर - अमरित (अमृत), धर (पकड़), के छुए भाव (स्पर्ष), पहुँच (यथावत)
8. अरझना - फंसड़ना (फँसना), लटकना (यथावत), गुरमेटाना (उलझना), अटकना (यथावत)
9. आरा - लकड़ी चीरे बर लोहा के दाँतादार पट्टी (लकड़ी चीरने के लिए लोहे की दाँतावाली पट्टी), गाड़ा - चक्का मा लगे ठाढ़ लकड़ी, (बैलगाड़ी के पहिये में लगी खड़ी लकड़ी), पानी बोहाय के रद्दा (जल प्रवाह मार्ग), बहुलता होय के स्थिति (बहुलता होने की स्थिति)
10. उठाना - ठाड़ करना (खड़ा करना), उचाना (जगाना), बोझा उचाना (भार वहन करना), बढ़ाना (उन्नत करना)
11. ओरियाना - ओरी - ओरी करना (क्रमबद्ध करना), गाँजना (थप्पी करना), बिगराना (फैलाना), बीते बात ला दुहराना (बीती बातों को प्रस्तुत करना)
12. कड़कना - कड़ - कड़ आवाज करना (कड़ - कड़ की आवाज करना), तेल, घीव आदि के तीपना (तेल, घी आदि का तपना), तेल मा लसुन, जीरा आदि ला भूंजना (तेल में लहसुन, जीरे आदि का भुनना), रोहिना मारना ( बिजली चमकना)
13. कलगी - पागा मा लगाए फूल के गुच्छा (पगड़ी में लगाया जानेवाला पुष्प - गुच्छ), मंजूर नइते कुकरा के मुँडी के मुकुट (मोर या मुगें के सिर की चोटी), चूँदी मा लगाय, जाथे तउन कंघी (बाल में लगाया जानेवाला कंघा)
14. काठी - घोड़ा के पीठ मा मड़ाथे तउन आसनी (घोड़े - की पीठ पर रखने की जीन), तन के ठाठा (शरीर का ढाँचा), मुरदा लेगे खातिर बांस के बनाए खटोला (शव ले जाने के लिए बांस का बना ठाठ), माटी दे बर जाए के बुता (मृतककर्म)
15. कुसी - गहूँ, जौ आदि के फोकला (गेहूँ, जौ आदि का छिलका), पंडरी - भूरी रंग के गाय (सफेद - भूरे रंग की गाय), नान - नान आँखीवाली (छोटी - छोटी आँखोंवाली)
16. खरोना - ओनहाँ धोए खतिर पानी तिपोना (कपड़ा धोने के लिए पानी गरम करना), सखार करना (अधिक नमकीन करना), घीव नइते तेलजरो डारना (घी या तेल को जला डालना)
17. खिरना - नानचुक होना (छोटा होना), गवाँ जाना (गुमजाना), नंदा जाना (प्रचलन समाप्त होना)
18. गचकाना - झंझेटना (हिचकोलना), मरई - धमकई करना (प्रताड़ित करना), ठठाना (मारना), दगा देना (धोखा देना)
19. गजरा - गाजा (झाग), फूल के गोप्फा (पुष्प - गुच्छ), ढोल के डेरी ताल (ढोलक की बाई ताल), ताल के कोर मा लगे चमड़ा के गोल पट्टी (ताल पर लगी किनारेवाली चमड़े की गोल पट्टी)
20. गाज - बिपत (बिपत्ति), गाज गिरना (बिजली गिरई) (आसमानी बिजली गिरना) बाफुर (झाग), पानी भीतरी के एक पउधा (एक जलीय पौधा)
21. गुम्जा - कलेचुप रहइया (शांत रहनेवाला), अलाल (आलसी), मिंझरत (मिश्रित), सही हिसाब नइ बइठना, (सही हिसाब न मिलना)
22. चपकना - मसकना (दबाना), लुकाना (छिपाना), चटकना (चिपकना)
23. चरकना - गुसियाना (गुस्सा होना), चिराना (फाड़ना), कुड़कना (चिढ़ना), टुटना (विभक्त होना), दर्रा फाटना (दरार पड़ना)
24. चर्राना - दर्रा फाटना (दरार पड़ना), चिरा जाना (फट जाना), चरचराना (तेज धूप लगना), मार परे ले दरद होना (चोट लगने से दर्द होना)
25. चलाना - निभाव करना (निभाना), उपयोग करना (व्यवहृत करना), चालू करना (शुरू करना), मुरुख बनाना (बेवकूफ बनाना), रोपा लगाना (रोपाई करना), चन्नी चलवाना (चलनी कराना)
26. चापा - चापा (पइसा के गट्ठा), पुरुत (तह), सांकुर (संकीर्ण), चापट (चिपका हुआ), चिपचिपहा (चपचपा), लट बँधावल (लटा हुआ), काँटा के ढेरी (काँटों का ढ़ेर)
27. चुरना - पसताना (पछताना), जेवन चुरना (भोजन का पकना), बिपत ला सहना (विपत्ति झेलना), नंगत के मिहिनत करना (कठोर परिश्रम करना)
28. चूरा - हांत के एक गहना (हाथ में पहनने का कड़ा), कोनो जिनिस मा लगाए खातिर लोहा आदि ले बने चूरी (किसी वस्तु में लगाने के लिए लोहे आदि की बनी गोल पट्टी), सांकुर (सकरा), नानकुन (छोटा), भुरका (चूर्ण)
29. चोभा - कांटा (कांटा), पीका (अंकुर), पीकी (अंकुरण), चोभी (ठूंठ)
30. छपहा - दू किलो अनाज ऊ के अकार नापे के काठा (दो किलो अनाज आदि का आकारमापी - काठा), छपल (छपा हुआ), नान्हें (छोटा)
31. छराना - मार खाना (मार खाना), छरा जाना (क्षतिग्रस्त होना), नान - नान कुटका होना (टुकड़ों में विभक्त होना), कुटाना (कुटा जाना)
32. जनाना - तिरिया (स्त्री), याद देवाना (स्मरण कराना), अनभो कराना (अनुभव कराना), बताना (बतलाना), सुरता (याद)
33. जिपरहा - गोठ - गोठ मा किरिया खवइया (बात - बात में सौगंध खाने वाले), सूम (कृपण), जिद्दी (हठी)
34. जोरना - जोंड़ना (जोड़ना), सकेलना (संचित करना), डारना (भरना), भेंट कराना (मिलाना या आमने सामने करना)
35. झार - बिख (विष), पेंड (पेड़), तेज गमक (तीखी गंध), गुंस्सा (गुस्सा)
36. झोइला - अंगारवाले कोइला (जलता हुआ कोयला), झोलंगा (ढीला - ढाला), कोचरहा (कुंचित)
37. झोरहा - रसहा (रसीला), झोलंगा (ढीला - ढाला), पसरल (फैला हुआ)
38. ठसना - मोल - भाव होना (सौदा तय होना), जोम देना (भीड़ना), ठेस लागना (टकराना)
39. ठुर्रा - दूरू (अंकुरित न हो पानेवाला बीज), झुक्खा (शुष्क), टाँठ (कड़ा), बंठा (बौना)
40. डंटना - चिपकना (सटना), भीड़ना (प्रवृत्त होना), सकलाना (एकत्रित होना)
41. डोलना - हालना (हिलना), बात ले हटना (वचन बद्ध न रहना), गलती होना (गलत होना), सुध बिसरना (भूल होना)
42. ढ़ारना - उलदना (ढालना), गिराना (गिरा देना), थिराना (विश्राम करना)
43. ढोकरना - लकर - लकर पीना (जल्दी - जल्दी पीना), घेरी - बेरी गोहराना (बारबार अनुनय करना), अथक होना (असमर्थ होना), मंडिया के पाँव परना (घुटने के बल बैठ प्रणाम करना)
44. ढोढ़िहा - पानी के रहइया एक ठन साँप (पानी में रहनेवाला एक सर्प), साँप के अकार मा एक परकार के करधन (सर्प के जैसा दिखनेवाला एक कार का कटिबंध), कोनो पिये के जिनिस ला बिक्कट के पियइया (किसी पेय पदार्थ को अधिक पीनेवाला)
45. तनना - अटियना (अकड़ना), बल बाँधना (हिम्मत करना), झिंकाना (खिचाना), बाढ़ना (फैलना)
46. ताव - गुंस्सा (गुस्सा), रोस (जोश), गुमान (अहंकार), आँच (ताप)
47. दररना - ओनहाँ आदि के चिराना (कपड़ा आदि का फटना), लस खाना (पस्त होना), थकना (थकजाना)
48. धंसना - खुसरना (गड़ना), गोभाना (चुभना), फसड़ना (फंसना)
49. धनी - गोसइयाँ (पति). मालिक (स्वामी), धनमान (धनवान), रहिस (धनवान)
50. धमकना - मुंड पिराना (सिर दर्द होना), आना (आना), जाना (जाना), गुस्साना (गुस्सा होना)
51. नजराना - टोनहाना (जादू - टोना करना), अँखियाना (नेत्र से संकेत करना)
52. निमगा - जुच्छा (खाली), आरुग (शुद्ध), सिरिफ (सिर्फ)
53. नेतना - आँकना (अनुमान लगाना), बुता नेमना (कार्य सौपना), भंउरा मा नेती लपेटना (भौरे में रस्सी लपेटना), मकान बर छान्हीं छाय खातिर भदरी पीटना (मकान में खप्पर छाने के लिए लकड़ी का ढांचा तैयार करना)
54. पकलाना - पाक जाना (पक जाना), पिउंराना (पिला पड़ जाना), चूंदी पाक जाना (बाल का सफेद हो जाना) बुढ़ाजाना (वृद्ध हो जाना), बिमारी के सेती झिटक जाना (बिमारी से कमजोर हो जाना)
55. पटिया - खटिया - पाटी (खाट की पाटी), बाजवट (तखत), छान्हीं के बीचों - बीच एक लंभा अउ मोट्ठा लकड़ी जउन हा कड़ी जइसे काम करथे (छप्पर के नीचे की एक लंबी एवं मोटी लकड़ी जो कड़ी जैसा काम करती है)
56. पटियाना - इंतकाल होना (मर जाना), सुत जाना (सो जाना), अल्लर पर जाना (शिथिल पड़ जाना), पाटी पारना (कंघी करना)
57. पठवाना - भेजवाना (भेजना), चिक्कन हो जाना (चिकना हो जाना), काई रच जाना (काई जम जाना)
58. परपराना - जीभ मा जलन होना (जीभ में जलन होना), जाड़ के सेती चमड़ी मा झुर्रा आना (ठंड के कारण त्वचा में खिंचाव होना), पेड़ - पउधा ओ मा नंगतेहे फर धरना (पेड़ - पौधे आदि में अधिक फल लगना), पेड़ ले फर मन के नंगतेहे झरना (वृक्ष से फलों का अधिक मात्रा में झड़ना)
59. पाना - पतई (पत्ता), पन्ना (कागज का पन्ना), कोरा मा उचाना (गोद में लेना), मिलना (प्राप्त होना)
60. पार - जात बिसेस के खंड (जाति विशेष का भाग), नदिया- नरवा के कोर (नदी - नाले का तट), कुओं के पार (कुएँ की जगह), गम नइते हिआव (पता या जानकारी)
61. पोठ - मजबूत (मजबूत), पोक्खा दानावाला (पुष्ट दानोवाला), मोट्ठा (मोटा), बड़े (बड़ा), धनमंता (धनवान) कड़ा (ठोस), बजनी (भारी)
62. फरी - ढार नाँव के औजार (ढाल नामक अस्त्र), साफ (स्पष्ट)
63. फाँदना - नहाँकना (लाँघना), कूदना (कुदना), गाड़ा मा बइला फाँदना (गाड़ी में बैल को जोतना), बाँधना (बांधना), फाँसना (फांसना), बुता मा लगाना (काम में लगाना)
64. फाँदा - झोल्ली (जाल), बँधना (बंधन), परसानी (परेशानी), झोलना (मछली जाल)
65. फुरहरी - नाक मा पहिरे के सोन के एक गहना (नाक में पहनने का एक स्वर्णाभूषण), फूल - बाहरी (फुल झाडू), लउँग (लौंग)
66. बइठना - आसनी मा बिराजना (आसन ग्रहण करना), पिचकना (दबना), कमती होना (कम होना)
67. बजरहा - बजारू (बाजार का), सस्तहा (सस्ता), बजार जवइया (बजार जानेवाला)
68. बरछा - कटारी (कटार), खुसियार के खेत (गन्ने का खेत), बरोबर उँचई वाला पउधा (समान ऊंचाई वाला पौधा)
69. बरना - कंडिल के बाती (बर्नर), जरना (जलना), डोरी बरना (रस्सी बटना), घेपना (सानिध्य में रहना)
70. बिछना - जठना (बिस्तर), छिदरना (बिखरना), मरना (मृत), बगराना (फैलाना)
71. बिसाना - छिदराना (बिखेरना), उपजाना (उत्पादन करना), सकेलना (संचित करना), मोल दे के लाना (खरीदना), हतिया करना (हत्या करना)
72. बोहाना - बोझा लादना (भार वहन करना), बोहा देना (प्रवाहित कर देना), आदत - बेवहार ले गिरना (पतित होना), गवां देना (गुमा देना)
73. भदभदहा - मोट्ठा (मोटा), गाढ़ (गाढ़ा), भद (मद्दा)
74. मउर - आमा के फूल (आम का बौर), कुकरा नइते मंजूर के मुकुट (मुर्गे या मयूर की कलगी), सेहरा (सेहरा)
75. मरना - झुखाना (सूखना), दुख भोगना (दुख सहना), बड़ मयां करना (अधिक प्रेम करना), इंतकाल होना (मृत्यु होना)
76. मरहा - रेगड़ा (दुर्बल), कंगला (निर्धन), मरझुरहा (मृतवत)
77. मायाँ - जोगानी (धन), किरवार (परिवार), मयां (मोह)
78. मिसतिरी - हलवई (हलवाई), राजमिसतिरी (राजगीर), बढ़ई (कारीगर), मसीन बनइया (मशीन सुधारक)
79. मुँडी - मुंड (सिर), कोर (किनारा), छोर (छोर), कोनो जिनिस के दुनो छोर के जोड़ (किसी वस्तु के दोनों सिरों की जोड़)
80. मुंडेरना - मुरकेटना (मोड़ना), डोरी आँटना (रस्सी - बटना), बाँधना (बांधना), भाँड़ी के इंटा - पथरा ला गिरे ले वचाए खातिर माटी चघाना (दीवार के ईट - पत्थर को गिरने से बचाने के लिए मिटी चढ़ाना)
81. मुहेला - मुंहजोरी (मुंहजोरी), बिक्कट के मयाँ (अत्यधिक प्रेम), सिंग दरवाजा (मुख्य दरवाजा)
82. मोटइया - मोट्ठा होवइया (मोटा होनेवाला), हितइया (संतृप्त होनेवाला), गुमान करइया (घमंड करनेवाला)
83. रंगझाँझर - कलकलहिन (कलह पैदा करनेवाली), पुचपुचहिन (रंगीन मिजाजवाली), बिक्कट सज - धज के रहइया तिरिया (अधिक साज - श्रृंगार करनेवाली स्त्री)
84. रचना - थप्पी मारना (किसी वस्तु को क्रमबद्ध रखना), सिरजना (निर्माण करना), रंगना (रंगाई)
85. रिरयइया - रेंदियहा (हठी), चिल्लइया - (चिल्लानेवाला), गिड़गिड़इया (गिड़गिड़ानेवाला)
86. रोंठ - बिसेस परकार के रोटी (विषेष प्रकार की रोटी), मोट्ठा (मोटा), धनमंता (धनवान), बड़े (बड़ा)
87. सँटइया - चुनइया (चयनकर्ता), छंटइया (साफ करनेवाला), जोड़इया (जोड़नेवाला), अलगइया (अलग करने वाला)
88. सवाँगा - सजे - सँवरे के बुता (श्रृंगार करने की क्रिया या भाव), सजे - संवरे के जिनिस (श्रृंगार सामग्रियाँ), तुरंत (तत्काल)
89. सधइया - साद मरइया (इच्छा रखनेवाला), कोनो बुता के भरपूर जानकारी रखइया (किसी कार्य में दक्ष होनेवाला), अपन बुता ला पूरा करइया (अपने कार्य को पूर्ण करनेवाला), बचन के निभइया (वचन को निभानेवाला)
90. सरी - पूरुत (परत), पूरा (पूर्ण), बार (बार बार)
91. सानना - मेलना (गूंथना), मइलाना (गंदा करना), मिंझारना (मिलाना)
92. सेवर - कोंवर (नरम), गेदरहा (अधपका), नानकुन (छोटा), लिल्हर (कमजोर)
93. सेसा - छोल्टी (चोकर), छेछन (नाक की सूखी मैल), गुमान (घमंड), छिल्का (छिल्का)
94. हथेलना - हाँत ले ढकेलना नइते पीटना (हाथ से धक्का देना या मारना), हंथियाना (पकड़ना), चोराना (चुराना)
95. हड़बड़ाना - लकर लकर करना (जल्दबाजी करना), भड़कना (डांटना), लड़बड़ाना (लड़खड़ाना)
96. हबरना - धरना (पकड़ना), मुहीं - के - मुहाँ होना (आमने - सामने हो जाना या आमना सामना), गडना (चुभना)
97. हरना - हरिना (हिरण), नँदा जाना (प्रचलन समाप्त हो जाना), चोरी हो जाना (चोरी होना), गवां जाना (गुम जाना)
98. हलर हलर - बिनडर नइते संकोच के (बिना भय या संकोच के), लकर लकर (जल्दी जल्दी)
99. हिरोना - पोसवा बनाना (पालतू बनाना), हराना (हराना), पालना (पालन करना)
100. तीर - पासमा (नजदीक), तीर (तीर कमान), तीरना (खिंचना), नदिया के तट (नदिया के तट)
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