हिंदी में परिभाषा - क्रिया के कर्त्ता को कारक कहते हैं। जिन शब्दों का क्रिया के साथ प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष संबंध होता है उन्हें कारक कहा जाता है अर्थात क्रिया को करने वाला कारक कहलाता है। ये शब्द संज्ञा एवं सर्वनाम शब्दों का वाक्य की क्रिया के साथ संबंध प्रकट करते हैं। जिस तरह हिंदी व्याकरण भाषा और अंग्रेजी व्याकरण भाषा में कारक होता है ठीक उसी प्रकार से छत्तीसगढ़ी भाषा व्याकरण में भी कारक होता है और उसके प्रकार होते हैं।
छत्तीसगढ़ी मा परिभाषा - संगिया नइते सर्वनाम के जउन रूप ले किरिया नइते आने सब्द के संग वोकर (संगिया नइते सर्वनाम के) संबंध के गियान होथे ओला 'कारक' केहे जाथे। छत्तीसगढ़ी मा कारक संगिया नइते सर्वनाम के बाद लगइया 'हा, ला, ले, बर' आदि विभक्ती मन होथे। 'हा, ला, ले, बर' आदि विभक्ती मन आने - आने कारक के आय। इंकर लगे मा ही कोनों सब्द कारक 'पद' बन पाथे। कारक पद नइते किरिया पद बने बिना कोनों सब्द बाक्य मा परयोग के लइक नइ राहय।
जइसे उदहारन -
नरसिंग भगवान हा अपन कोरा मा नख ले हिरनकसियप के पेट चिरिस।
ये बाक्य मा 'नरसिंग भगवान हा', 'कोरा मा' 'नख ले' हिरनकसियप के अउ 'पेट' संगिया मन के रूपांतर आय, इंकर ले ये संगिया मन के संबंध 'चिरिस' किरिया संग सूचित होथे।
कारक के प्रकार -
छत्तीसगढ़ी भाषा व्याकरण म कारक आठ परकार के होथे।
1. करता
2. करम
3. करन
4. संपरदान
5. अपादान
6. संबंध
7. अधिकरन
8. संबोधन
छत्तीसगढ़ी बिभक्ति (Chhattisgarhi Vibhakti)
ये कारक मन के गियान कराय खातिर संगिया नइते सर्वनाम के बाद जउन चिनहीं लगाय जाथे उनला 'बिभक्ती' कथे।
छत्तिसगढ़ी के कारक अउ उँकर विभक्ती मन अइसन ढंग ले हवय -
कारक - विभक्ती
करता - हा, हर
करम - ला
करन - ले
संपरदान - बर, बा, ला, के खातिर, के कारन
अपादान - ले
संबंध - के
अधिकरन - मा, म
संबोधन - ए, रे, एगा, एगो, गो, एवो, अवो, आदि।
बिभक्ती मन के बिसेसता (विभक्तिओं की विशेषताएं) -
1. बिभक्ती मन के परयोग सिरिफ संगिया अउ सर्वनाम के संग होथे।
जइसे उदहारन -
किसन हा आमा ला बजार ले एकर बर लाने हे।
राजा हा चाकलेट ला दुकान ले एकल बर लाने हे।
2. छत्तिसगढ़ी मा बिभक्ती मन (कुछ सर्वनाम ला छोड़ के) सुवतंत अस्तित्व मा रथे। इँकर ले संगिया नइते सर्वनाम के रूप हिंदी जइसे नइ बिगड़े।
3. बिभक्ती मन के काम सब्द मन ले संबंध बताना आय। एकर पाय के इँकर कोनों अर्थ नइ होय।
जइसे - हा, ले, ला आदि।
बिभक्ती मन के परयोग -
बिभक्ती मन के परयोग दू परकार ले होथे -
1. बिलगहा (विष्लिष्ट)
2. जोरंधा (संष्लिष्ट)
1. बिलगहा (विष्लिष्ट) - संगिया अउ कुछ सर्वनाम सब्द मन संग अवइया विभक्ती मन बिलगहा होथे, अर्थात अलग रथे।
जइसे उदहारन - मनटोरा हा, अंगोछा ला, भुइया मा, वोकर बर आदि।
2. जोरंधा (संष्लिष्ट) - कुछ सर्वनाम संग बिभक्ती मन जोरंधा परयोग मा आथे, अर्थात जुड़े रथे।
जइसे उदहारन - वोहा, मोला, येला, येमा, येहर, एकर, हमर, तुंहर, आदि।
कारक का विभक्ति में प्रयोग -
1. करता कारक - जउन मा संगिया अउ सर्वनाम के रूप मा किरिया करइया मन के गियान होथे, वोला करता कारक केहे जथे।
उदहारन -
1. मोहन पुस्तक पढ़त हे।
2. राम हा गाना गाइसे।
3. वहू हा गाना गाही।
4. सबोझन हा गाना गइन।
2. करम कारक - जउन मा संगिया अउ सर्वनाम किरिया के जेन रूप मा काम के फल के गियान होथे। वोला करम कारक केहे जाथे।
उदहारन -
1. मन्नू स्कूल चल दिस।
2. खाँधा ला टोर दिस।
3. बघवा ला मार दिस।
4. खेत ला जोत डरिस।
3. करन कारक - जउन मा संगिया अउ सर्वनाम के जेन रूप मा कोनो काम के साधन के होय के पता चलथे वोला करन कारक केहे जाथे।
उदहारन -
1. रावण, राम ले मरिस।
2. माटी ले सोन उबजही।
3. पागा बाँधे ले इमान नई जागे।
4. परबत ले निसयनी ऊंच।
4. संपरदान कारक - संगिया अउ सर्वनाम बर जेन रूप मा किरिया करे जथे वोला संपरदान कारक केहे जथे।
उदहारन -
1. गुरूजी लइका बर पुस्तक लाही।
2. रामू तोला पइसा दिही।
3. मंगइया ला कुछ दे दे।
4. तोला चांउर मिलगे।
5. अपादान कारक - जेकर ले संगिया अउ सर्वनाम के जेन रूप ले अलग बिलग ओय के गियान होथे वोला अपादान कारक केहे जथे।
उदहारन -
1. गंगा हिमालय ले निकलथे।
2. पेड़ ले आमा गिरिस।
3. में घर ले निकलेंव।
4. डारा ले बेंदरा कुदिस।
6. संबंध कारक - जउन मा संगिया अउ सर्वनाम के जेन रूप के एक दूसर ले जुड़े होय के गियान होथे वोला संबंध कारक केहे जाथे।
उदहारन -
1. ये मोहन के घर आय।
2. मितान के गाय भगागे।
3. सोन के गहना पहिरे हे।
4. एक हांत के पटका है।
7. अधिकरन कारक - जेकर ले संगिया अउ सर्वनाम के किरिया ले कोनो अधार के गियान होथे, वोला अधिकरन कारक केहे जथे।
उदहारन -
1. सइनिक युद्ध भुमी मा शहिद होगे।
2. तन मा दरद है।
3. पाव मा फोरा हे।
4. पथरा मा मढ़ा दे।
5. निसेयनी मा चढ़।
8. संबोधन कारक - संगिया के जउन रूप मा कखरो बुलाए के या संबोधित करे के पता चलथे वोला संबोधन कारक केहे जथे।
उदहारन -
1. ए दाई वो।
2. ए ददा गो।
3. ए रे टूरा।
4. एवो दुरी।
5. ए रे रामू एती आ तो।
इन्हें भी पढ़ें -
• छत्तीसगढ़ी अव्यय
• छत्तीसगढ़ी वचन
• छत्तीसगढ़ी सर्वनाम
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