छत्तीसगढ़ की सामान्य जानकारी | General information of Chhattisgarh
गठन - 01 नवंबर 2000
राजधानी - नवा रायपुर, अटल नगर
मातृ राज्य - मध्यप्रदेश
कुल क्षेत्रफल - 1,35,191 वर्ग किमी
जनसंख्या - 2,55,45,198
देश की जनसंख्या का प्रतिशत - 2.11% (16 वां स्थान)
जनसंख्या वृद्धि दर - 22.61 प्रतिशत
जनसंख्या घनत्व - 189 व्यक्ती/वर्ग किमी
लिंगानुपात - 991 स्त्री / 1000 पुरूष
साक्षरता - 70.28 प्रतिशत
क्षेत्रफल के आधार पर भारत संघ में स्थान - 9 वां स्थान
छत्तीसगढ़ का क्षेत्रफल देश के कुल क्षेत्रफल का - 4.11%
राज्य गठन में क्रम - 26 वां क्रम
राज्य निर्माण - 9 वीं पंचवर्षीय योजना (1997-2002)
छत्तीसगढ़ राज्य हेतु अधिनियम - मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000
छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक जानकारी | Administrative information of Chhattisgarh
कुल संभाग - 05
कुल जिले - 33
तहसीलों की संख्या - 227
नगर निगम - 14
नगर पालिका परिषद - 48
जिला पंचायत - 28
जनपद पंचायत - 146
ग्राम पंचायत - 11,651
कुल गांव - 20,234
राज्यसभा सीटें - 5
लोकसभा सीटें - 11 (ST - 04, SC - 01, UR - 06)
कुल सांसद - 16 (11 लोकसभा + 5 राज्यसभा)
विधानसभा सीटों की संख्या - 90 (ST - 29, SC - 10, UR - 51)
मुख्यमंत्री - श्री विष्णु देव साय
राज्यपाल - श्री रामेन डेका
सबसे बड़ा संभाग (क्षेत्रफल के आधार पर) - बस्तर
सबसे बड़ा जिला (क्षेत्रफल के आधार पर) - बीजापुर
सबसे छोटा जिला (क्षेत्रफल के आधार पर) - गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही
सबसे बड़ा तहसील (क्षेत्रफल के आधार पर) - पोड़ी-उपरोड़ा (कोरबा)
सबसे बड़ा विकासखण्ड (क्षेत्रफल के आधार पर ) - बिल्हा (बिलासपुर)
छत्तीसगढ़ की अन्य महत्वपूर्ण जानकारी | Other important information about Chhattisgarh
उच्च न्यायालय (High Court) - बिलासपुर (देश का 19 वां)
रेलवे जोन - दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन (SECR), बिलासपुर
राजस्व मण्डल का मुख्यालय - बिलासपुर
शासकीय मुद्रणालय - राजनांदगांव
ब्रेललिपि प्रेस - तिफरा (बिलासपुर)
भारत संघ में धान का कटोरा - छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ का नृजातीय म्यूजियम - जगदलपुर (बस्तर)
छत्तीसगढ़ का इतिहास | History of Chhattisgarh
छत्तीसगढ़ को दक्षिण कोसल इसलिए कहा जाता था क्योंकि ये कोसल प्रदेश का एक
हिस्सा था इसलिए इसका इतिहास पौराणिक काल तक पीछे की ओर चला जाता है। पौराणिक
काल का 'कोसल' प्रदेश, कालान्तर में 'उत्तर कोसल' और 'दक्षिण कोसल' नाम से दो
भागों में विभक्त हो गया था इसी का 'दक्षिण कोसल' वर्तमान छत्तीसगढ़ कहलाता
है। इस क्षेत्र के महानदी का नाम उस समय चित्रोत्पला था। वाल्मीकि के रामायण
में भी छत्तीसगढ़ के बीहड़ वनों तथा महानदी का स्पष्ट विवरण है। छत्तीसगढ़
स्थित सिहावा पर्वत के आश्रम में निवास करने वाले श्रृंगी ऋषि ने ही अयोध्या
में राजा दशरथ के यहाँ पुत्र्येष्टि यज्ञ करवाया था जिससे कि तीनों भाइयों
सहित भगवान श्री राम का पृथ्वी पर अवतार हुआ। राम के काल में यहाँ के वनों
में ऋषि-मुनि, तपस्वी आश्रम बना कर निवास करते थे और अपने वनवास की अवधि में
राम यहाँ आये थे।
इतिहास में छत्तीसगढ़ के प्राचीनतम उल्लेख सन 639 ई. में प्रसिद्ध चीनी यात्री
ह्मवेनसांग के यात्रा विवरण में मिलते हैं। उनकी यात्रा विवरण में लिखा है कि
दक्षिण कोसल की राजधानी सिरपुर थी। बौद्ध धर्म की महायान शाखा के संस्थापक
बोधिसत्व नागार्जुन का आश्रम सिरपुर (श्रीपुर) में ही था। ऐसा माना जाता है
कि महाकवि कालिदास का जन्म भी छत्तीसगढ़ में ही हुआ था।
प्राचीन काल में दक्षिण-कोसल के नाम से प्रसिद्ध इस प्रदेश में मौर्यों,
सातवाहनों, वकाटकों, गुप्तों, राजर्षितुल्य कुल, शरभपुरीय वंशों, सोमवंशियों,
नल वंशियों, कलचुरियों का शासन था। बिलासपुर जिले के पास स्थित कवर्धा रियासत
में चौरा नाम का एक मंदिर है जिसे लोग मंडवा-महल भी कहते है। इस मंदिर में
सन् 1349 ई. का एक शिलालेख है जिसमें नाग वंश के राजाओं की वंशावली दी गयी
है। नाग वंश के राजा रामचन्द्र ने यह लेख खुदवाया था। इस वंश के प्रथम राजा
अहिराज कहे जाते हैं। भोरमदेव के क्षेत्र पर इस नागवंश का राजत्व 14 वीं सदी
तक कायम रहा।
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