कबीरधाम जिले का सामान्य परिचय
06 जुलाई 1998
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जिला मुख्यालय
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कवर्धा
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मातृ जिला
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सीमावर्ती जिले (3)
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सीमावर्ती राज्य (1)
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मध्यप्रदेश
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तहसील (5)
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1. पंडरिया, 2. बोड़ला, 3. कबीरधाम, 4. सहसपुर लोहारा, 5. रेंगाखार
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विकासखंड (4)
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1. पंडरिया, 2. बोड़ला, 3. कबीरधाम, 4. सहसपुर लोहारा
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नगर पालिका परिषद (2)
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1. कवर्धा, 2. पंडरिया
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विधानसभा क्षेत्र (2)
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1. कवर्धा, 2. पंडरिया
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प्रमुख जनजाति
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बैगा, अगरिया
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राष्ट्रीय राजमार्ग
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NH 30, NH 130 (A) (पंडरिया-मुंगेली-बिलासपुर)
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पिनकोड
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491995 (कवर्धा)
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आधिकारिक वेबसाइट
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• प्रमुख नदियां -
1. हाफ नदी
उद्गम - कांदावनी की पहाड़ी (मैकल श्रेणी)
2. बंजर नदी
उद्गम - कांदावनी की पहाड़ी (मैकल श्रेणी)
• उद्योग -
1. हरिनछपरा - औद्यौगिक क्षेत्र
2. भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना मर्यादित
स्थापना - मार्च 2003
स्थान - राम्हेपुर (कवर्धा)
विशेष -
• यह राज्य का प्रथम शक्कर कारखाना है।
• शक्कर के सह उत्पाद में से 6 मेगावाट बिजली उत्पादन किया जा रहा है।
• भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना में पीपीपी (PPP) मॉडल पर 80 KLPD (किलोलीटर प्रति दिन) क्षमता के इथेनॉल प्लांट स्थापित है। यह देश का पहला इथेनॉल प्लांट है।
3. सरदार वल्लभभाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना
स्थापना - 2016
स्थान - बिसेसरा, पंडरिया (कवर्धा)
विशेष - अपशिष्ट से 14 मेगावाट विद्युत उत्पादन (सह उत्पाद से)
• खनिज -
1. लौह अयस्क भंडारण क्षेत्र - एकलामा, चेलिकलामा, चिल्फीघाटी
2. बॉक्साइट भंडारण क्षेत्र - बोरई, दलदली
3. अन्य खनिज - चूना पत्थर एवं सोपस्टोन।
• अभ्यारण्य -
1. भोरमदेव अभ्यारण्य
क्षेत्रफल - 352 वर्ग किमी
स्थापना - 2001
विशेष - राज्य में स्थापित नवीन अभ्यारण्य
• शिक्षा -
1. मात्स्यिकी महाविद्यालय, कवर्धा
2. संत कबीर कृषि महाविद्यालय, कवर्धा
3. शारदा संगीत महाविद्याल, कवर्धा
• मुख्य परियोजना -
1. छीरपानी
2. सुतियापाट
3. बेहारखार
4. कर्रानाला
5. सरोदा जलाशय
कबीरधाम जिले का इतिहास
जिला मुख्यालय से लगभग 17 किमी दूर भोरमदेव ऐतिहासिक और पुरातत्व दृष्टि से
बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। यह स्थान 9 वीं शताब्दी से 14 वीं शताब्दी तक
नागवंशी राजाओं की राजधानी थी। उसके बाद यह क्षेत्र हैहयवंशी राजाओं के अधिकार
में आ गया जो राज्य रतनपुर से संबंधित थे। इन राजाओं द्वारा निर्मित मंदिर और
पुराने किले के पुरातात्विक (Archaeological) अवशेष अभी भी उपलब्ध हैं।
कबीरधाम जिले में पर्यटन स्थल
कवर्धा
1. राधाकृष्ण मंदिर
2. काली मंदिर (सुधा वाटिका)
3. कवर्धा महल
निर्माता - महाराजा धरमराज सिंह
प्रथम गेट - हाथी दरवाजा
भोरमदेव
• निर्माण - 1089 ई. (11वीं शताब्दी)
• स्थान - ग्राम छपरी के निकट चौरागांव
• शासनकाल - गोपाल देव (फणी नागवंशीय शासक)
• द्वारा - लक्ष्मणदेव राय
• शैली - नागर शैली
विशेष -
• यह मंदिर मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिर के समतुल्य होने के कारण इसे छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहते हैं।
• यहां प्रतिवर्ष भोरमदेव महोत्सव मनाया जाता है।
मड़वा महल
• निर्माण - 1349 ई. (14वीं शताब्दी)
• संस्थापक - रामचंद्रदेव
• गर्भगृह - शिवलिंग
छेरकी महल
• स्थान - भोरमदेव मंदिर के निकट
• विशेष - मंदिर के गर्भगृह में बकरे की गंध आती है इसलिए इसे छेरकी
महल कहा जाता है।
पचराही
• यह पुरातात्विक स्थल है।
• यह फणीनागवंश से संबंधित था।
जलप्रपात
• रानी दहरा जलप्रपात
• गोदगोदा जलप्रपात (गिजर्रा नदी)
अन्य पर्यटन स्थल
1. बकेला (प्रसिद्ध जैन तीर्थ)
2. सतखंडा महल
3. कामटी (भगवान नरसिंह की मूर्ति)
4. लोहारा बावली
5. सरोधा दादर
6. पीड़ा घाट
7. बुखारी गुफा
8. रामचुआ जलस्रोत
राज्य संरक्षित स्मारक
1. भोरमदेव मंदिर
2. मड़वा महल
3. छेरकी महल
कबीरधाम जिले में विशेष
• कवर्धा 14 देशी रियासतों में से एक रियासत था।
• बकरी प्रजनन प्रक्षेत्र - रामपुर (ठाठापुर), कबीरधाम।
• बदरगढ़ की चोटी (1176 मीटर) मैकल श्रेणी की ऊँची चोटी।
• प्रदेश में सबसे कम वर्षा वाला क्षेत्र (वृष्टिछांया प्रदेश - मैकल पर्वत
श्रेणी के कारण)
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