5212.06 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला रायगढ़ जिला उत्तरी क्षेत्र जहां बिहड़, जंगल, पहाडियो से आच्छादित है, वही इसका दक्षिण हिस्सा ठेठ मैदानी है। जिले की बहुसंख्यक आबादी गांवो में निवास करते है। बिरहोर इस जिले के विशिष्ट जनजाति है, जो धरमजयगढ़ क्षेत्र में निवास करते है। गोंड, कंवर, उरांव अन्य प्रमुख जनजातियों की सूची में शामिल है। रायगढ़ को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाता है। रायगढ़ जिले में ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। यहां सिंघनपुर, ओगना, करमागढ़ की पहाड़ियों तथा रायगढ़ के समीप कबरा पहाड़ प्रागैतिहासिक युग के मनुष्यों द्वारा निर्मित शैलचित्र पाये गये है।
रायगढ़ जिले का सामान्य परिचय
01 जनवरी 1948 | |
जिला मुख्यालय | रायगढ़ |
सीमावर्ती जिले (6) | |
सीमावर्ती राज्य (1) | ओडिशा |
तहसील (10) | 1. रायगढ़, 2. पुसौर, 3. खरसिया, 4. घरघोड़ा, 5. तमनार, 6. लैलूंगा, 7. मुकड़ेगा, 8. धरमजयगढ़, 9. छाल, 10. कापू |
विकासखण्ड (9) | 1. खरसिया, 2. रायगढ़, 3. लैलूंगा, 4. तमनार, 5. घरघोड़ा, 6. धरमजयगढ़, 7. पुसौर |
नगर निगम (1) | 1. रायगढ़ |
नगर पालिका परिषद (1) | 1. खरसिया |
लोकसभा क्षेत्र (1) | 1. रायगढ़ (ST) |
विधानसभा क्षेत्र (4) | 1. रायगढ़, 2. खरसिया, 3. धरमजयगढ़ (ST), 4. लैलूंगा (ST) |
प्रमुख जनजाति | उरांव, बिरहोर |
राष्ट्रीय राजमार्ग | NH 153 (सरायपाली-रायगढ़ मार्ग) NH 49 (बिलासपुर-रायगढ़ मार्ग) |
पिनकोड | 496001 |
आधिकारिक वेबसाइट |
• भू-गर्भिक शैलक्रम -
1. गोंड़वाना क्रम
2. दक्कन ट्रैप
• खनिज -
• कोयला क्षेत्र -
1. मांड नदी घाटी क्षेत्र
2. खरसिया
3. धरमजयगढ़
4. छाल
5. महुवापाली
• बॉक्साइट क्षेत्र -
1. किंधा पहाड़
• स्वर्ण क्षेत्र -
1. सोना झरिया
• चूना पत्थर -
1. खरसिया
• औद्यौगिक क्षेत्र-
1. लारा
2. महुवापाली
3. सियारपाली
• शिक्षण संस्थान -
1. ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय
स्थान - ग्राम पूंजीपथरा, घरघोड़ा (रायगढ़)
2. कृषि कॉलेज, रायगढ़
3. शासकीय स्व. लखीराम अग्रवाल स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायगढ़
4. शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय, रायगढ़
कुलपति - प्रो. ललित प्रकाश पटेरिया
कुल सचिव - के.के. चंद्राकर
सम्बंध महाविद्यालय - 102
विशेष - 2020 में बिलासपुर महाविद्यालय से अलग हुआ
• हवाईपट्टी -
1. रायगढ़
• जिंदल ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज का स्वामित्व
• पूर्व में हरदी हवाईपट्टी सारंगढ़ में था
• उद्योग -
1. मोहन जूट मिल
• प्रदेश का एकमात्र जूट मिल जो स्वतंत्रता के पूर्व स्थापित की गई।
स्थापना - 1953
स्थान - रायगढ़
2. जिंदल स्टील पॉवर लिमिटेड
• एशिया की सबसे बड़ी स्पंज आयरन कंपनी
स्थापना - 1988
स्थान - रायगढ़
3. मोनेट इस्पात संयंत्र
4. केलकर प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड
5. पेपर ट्यूब कम्पनी रायगढ़
6. गम टेप कारखाना
7. एनटीपीसी (NTPC) लारा पुसौर
क्षमता - 4000 मेगावाट
वर्तमान उत्पादन - 1600 मेगावाट
• मेला -
1. रायगढ़ का मेला (जन्माष्टमी)
2. पोथ का मेला (जन्माष्टमी)
3. कांपू का मेला (महाशिवरात्रि)
4. कोसमानारा मेला (महाशिवरात्रि)
• व्यक्तित्व -
1. किशोर मोहन त्रिपाठी
संविधान निर्मात्री सभा में रियासतों से सम्मिलित
2. गोविंदराम झारा
जनजाति शिल्पकार
3. राजा चक्रधर
तबला वादक एवं संगीत सम्राट
4. कार्तिक राम - नर्तक
• रियासतें -
1. उदयपुर
2. खारंग नदी
3. छोटी नर्मदा
• चक्रधर समारोह -
शुरुआत - 1985
अवसर - प्रतिवर्ष गणेश चतुर्थी पर
स्थल - रामलीला मैदान, रायगढ़ में
द्वारा - राजा भूपदेव सिंह
विशेष - राजा चक्रधर के जन्म दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाता है।
• नदी -
1. केलो नदी
उद्गम - लैलूंगा पहाड़
परियोजना - केलो परियोजना
लाभान्वित जिले - जांजगीर-चांपा, रायगढ़
2. महानदी
• प्रदेश का सर्वाधिक लंबा पूल (1830 मीटर)
• सूरजगांव तथा नदी गांव के बीच स्थित है।
• जलप्रपात -
1. रामझरना जलप्रपात (रायगढ़)
नोट - रायगढ़ नलकूप द्वारा सर्वाधिक सिंचित जिला है।
रायगढ़ जिले का इतिहास
रायगढ़ छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित एक शहर है जो की रायगढ़ जिले का मुख्यालय है। यह शहर अपनी सांस्कृतिक विरासत के कारण छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक नगरी के नाम से प्रसिद्ध है। आजादी के पूर्व रायगढ़ राज्य में अंग्रेजो का प्रत्यक्ष राज न होकर राजाओं का राज्य था। भारत की आजादी के बाद भारतीय संघ में शामिल होने वाली पहली राज्य बनी जो मध्यप्रदेश राज्य में रायगढ़ जिले के रूप में शामिल किया गया।
महाराज मदन सिंह जी को रायगढ़ राज्य का संस्थापक माना जाता है। वे महाराष्ट्र में स्थित चांदा जिले के बैरागढ़ ग्राम से आए थे। पहले रायगढ़ संबलपुर राज्य का एक भाग था और मदन सिंह संबलपुर राज्य के सामंत थे, पारा कालान्तर में उन्होंने अपना स्वतंत्र राज्य स्थापित करा लिया था। मदन सिंह जी के बाद उनके उत्तराधिकारी तखत सिंह, बेत सिंह, दिलीप सिंह, जुझार सिंह, देवनाथ सिंह, घनश्याम सिंह, भूपदेव सिंह और चक्रधर सिंह क्रमशः राजा बने। चक्रधर सिंह महाराज स्वतंत्र रायगढ़ राज्य के अंतिम राजा थे।
रायगढ़ जिले में पर्यटन स्थल
सिंघनपुर की गुफा
• चंवरढाल पहाड़ी पर स्थित शैलचित्र
• पूर्व पाषाणकालीन स्थल, शैलचित्र के लिए चर्चित
• प्रदेश में खोजी गई सबसे पहली गुफा
• खोजकर्ता - एंडरसन (1910)
• छत्तीसगढ़ का भीमबेटका
अन्य पर्यटन स्थल
■ रामझरना - यह रामायणकालीन स्थल है।
■ बोतल्दा गुफा - यह छत्तीसगढ़ की सबसे लम्बी गुफा है।
■ कबरा पहाड़ का गुफा - यह मध्य पाषाणकालीन स्थल है। प्रदेश में सर्वाधिक शैल चित्र लाल रंग के सांभर, घड़ियाल की सीढ़ीनुमा शैल चित्र है।
■ भैंसगढ़ी शैलाश्रय - प्रागैतिहासिक कालीन शैलचित्र युक्त गुफा।
■ बसनाझर शैलाश्रय - सिंघनपुर के समीप स्थित प्राचीनतम शैलचित्र युक्त गुफा।
■ टीपाखोल (प्राकृतिक) - यहां मानव एवं पशु - पक्षियों के शैलचित्र चित्रित है।
■ खैरपुर - यहां अंकित शैलचित्र अंधेरे में चमकते हैं। खैरपुर की पहाड़ी में यह गुफा स्थित है।
■ ओंगना - धरमजयगढ़ के समीप स्थित। यहां प्राचीनतम शैलाश्रय स्थित है। यह ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थल है।
■ करमागढ़ पहाड़ - यह पहाड़ बांस एवं अन्य झाड़ियों से आच्छादित व अनेक शैल चित्र है।
■ बेनीपाट शैलाश्रय - करमागढ़ शैलाश्रय के पश्चिम दिशा में स्थित है।
■ खरसिया - छोटे पंडरमुड़ा, अमरगुफा
■ बार एवं देवगांव - मौर्यकालीन साक्ष्य
■ धरमजयगढ़ - शिशरिंगा घाट, ओंगना
अन्य प्रागैतिहासिक स्थल
1. सुतीघाट - यहां पर चित्रित किसान हल हाथ में लिये हुए हैं।
2. गाताडीह - पशु आकृतियां, मानवाकृतियों का अंकन।
3. सिरौली - डोंगरी शैलाश्रय, पशुओं का अंकन।
4. छोटे पंडरमुड़ा - पाषाणयुगीन कब्रगाह प्राप्त हुए हैं।
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