सरगुजा जिला छत्तीसगढ़ राज्य के उत्तरी हिस्से में स्थित है। जिले का मुख्यालय
अंबिकापुर है। इस जिले के उत्तर में उत्तरप्रदेश राज्य की सीमा है, जबकी
पूर्व में झारखंड राज्य है। जिले के दक्षिणी क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का रायगढ़,
कोरबा एवं जशपुर जिला है, जबकी इसके पश्चिम में कोरिया जिला है। सरगुजा जिला होने
के साथ-साथ, एक मण्डल मुख्यालय भी है जिसके कारण इसके मुख्यालय अंबिकापुर में
डिवीज़नल कमिश्नर का कार्यालय भी स्थित है।
जिले के लगभग 58% क्षेत्र वनों के नीचे स्थित है। नजुलुल और अन्य क्षेत्रों का
वनस्पति मानव गतिविधियों के साथ अक्सर बदल रहा है और भूमि उपयोग जलवायु, मिट्टी
और जैविक कारक प्राकृतिक वनस्पति के कार्य हैं। इन तीन जलवायु कारकों में से
जिनमें मौसमी विविधता के साथ वर्षा, तापमान और उनके संयोजन भी शामिल हैं।
सरगुजा जिले का सामान्य परिचय
01 नवंंबर 1948
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जिला मुख्यालय
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अंबिकापुर
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सीमावर्ती जिले (5)
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तहसील (7)
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1. लखनपुर, 2. उदयपुर, 3. अंबिकापुर, 4. धौरपुर, 5. बतौली, 6. सीतापुर,
7. मैनपाट
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विकासखण्ड (7)
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1. लखनपुर, 2. उदयपुर, 3. अंबिकापुर, 4. लुण्ड्रा, 5. सीतापुर, 6. बतौली,
7. मैनपाट
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नगर निगम (1)
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1. अंबिकापुर
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लोकसभा क्षेत्र (1)
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1. सरगुजा
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विधानसभा क्षेत्र (3)
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1. लुण्ड्रा (ST), 2. सीतापुर (ST), 3. अंबिकापुर
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प्रमुख जनजाति
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खैरवार, कोरकू, पारधी, खुड़िया, सौंता
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राष्ट्रीय राजमार्ग
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NH 43 (कोरिया-सूरजपुर-सरगुजा-जशपुर)
NH 130 (बलौदाबाजार-बिलासपुर-कोरबा-अंबिकापुर)
NH 343 (अंबिकापुर -रामानुजगंज)
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पिनकोड
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497001 (अंबिकापुर)
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आधिकारिक वेबसाइट
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• भू-गर्भिक शैलक्रम -
गोंड़वाना क्रम
• रियासत -
1. सरगुजा रियासत
2. वंश - रक्सेल
• औद्योगिक क्षेत्र -
1. गंगाखुर्द
• खनिज -
कोयला क्षेत्र
1. लखनपुर
2. सेडु
3. सीतापुर
4. बिरजूपानी
5. पांचबहिनी क्षेत्र
बॉक्साइट क्षेत्र
1. मैनपाट
2. डांडकेसरा
3. परपटिया
4. सातपहाड़ी क्षेत्र
• सांस्कृतिक समारोह -
1. रामगढ़ महोत्सव
रामगढ़ आषाढ़ माह के प्रथम दिवस से दो दिवसीय समारोह का आयोजन।
2. सरगुजा महोत्सव
• नदी -
1. मांड नदी
लम्बाई - 155 किमी
उद्गम - मैनपाट
जलप्रपात - सरभंजा जलप्रपात
2. रिहंद नदी
लम्बाई - 145 किमी
उद्गम - छुरी मतिरिंगा की पहाड़ी
परियोजना - श्याम घुनघुट्टा परियोजना
• शिक्षा -
1. गहिरागुरू विश्वविद्यालय, अंबिकापुर
2. शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, अंबिकापुर
• परियोजनाएं -
1. कुंवरपुर परियोजना
2. श्याम परियोजना
3. चुहिया पाट परियोजना
4. बंकी परियोजना
सरगुजा जिले का इतिहास
विभिन्न मंदिरों की पत्थर पत्थर की नक्काशी और पुरातन अवशेषों की उपस्थिति मसीह
(बीसी) से पहले इस क्षेत्र के अस्तित्व के सबूत दिखाती है। 4 बीसी में मौर्य
वंश के आगमन से पहले, यह क्षेत्र नंदा कबीले के भगवान में था। 3 बीसी से पहले
इस क्षेत्र को अपने आप में झगड़ा करने के बाद छोटे हिस्सों और उनके सरदार में
बांटा गया था। तब एक राजपूत राजा पालमू जिले (बिहार) में राक्षल कबीले से
संबंधित है और उसके नियंत्रण में लिया गया। 1820 में अमर सिंह सरगुजा राज्य के
राजा थे जिन्हें 1826 में “महाराजा” के रूप में ताज पहनाया गया था। 1882 में
रघुनाथ शरण सिंह देव ने सरगुजा राज्य पर अपना नियंत्रण लिया था जिसे भगवान
दफारी द्वारा “महाराजा” के रूप में सम्मानित किया गया था। भारत की समकालीन जीत
के बाद उन्होंने सरगुजा की राजधानी अंबिकापुर में एडवर्ड मिडिल स्कूल, डाकघर,
टेलीग्राफ कार्यालय, मेडिकल स्टोर, जेल और अदालतों की स्थापना की। प्रमुख आबादी
में जनजातीय आबादी शामिल है। इन आदिम जनजातियों में से हैं पांडो और कोरवा, जो
अभी भी जंगल में रह रहे हैं, पांडो जनजाति खुद को महाकाव्य महाभारत के “पांडव”
वंश के सदस्य मानते हैं। कोरवा जनजाति महाभारत के “कौरव” के सदस्य होने का
मानना है।
सरगुजा जिले में पर्यटन स्थल
मैनपाट (छत्तीसगढ़ का शिमला)
संज्ञा - छोटा तिब्बत, छत्तीसगढ़ का शिमला
• यहां तिब्बती शरणार्थियों को 1962 में बसाया गया।
• यह स्थल छ.ग. में तिब्बती संस्कृति का प्रमुख केन्द्र है।
• यहां से मांड नदी का उद्गम हुआ है।
• यहां दर्शनीय स्थलों में जलप्रपात - टाईगर प्वांइट, ईको प्वांइट, फिश
प्वांइट, मेहता प्वांइट, बौद्ध मंदिर तथा परपटिया स्थित है।
• मैनपाट प्राकृतिक वर्ग का पर्यटन स्थल है।
• यहाँ से बाक्साइट खनिज का उत्खनन किया जाता है।
मैनपाट के अन्य प्रमुख स्थलें -
1. बौद्ध मंदिर - यह मंदिर मैनपाट में स्थित है। इस मंदिर का
निर्माण परम्परागत बौद्ध वास्तुकला के अनुसार किया गया है।
2. टाईगर प्वाइंट - मैनपाट के पूर्वी भाग से महादेव मुड़ा नदी बहती
है जिसमें टाइगर प्वाइंट जलप्रपात निर्मित है । पहले यहाँ टाइगर घूमा करता था
इसी कारण इसका नाम टाईगर प्वांइट पड़ा।
3 . मछली (फिश) प्वाइंट जलप्रपात - पहाड़ी नाला पर निर्मित
जलप्रपात है जहां पर बहुत अधिक मछलियां मिलती है। इसी आधार पर मछली प्वाइंट
कहते हैं।
4. परपटिया - मैनपाट के पश्चिमी भाग से बंदरकोट की दुर्गम ऊंची
पहाड़ी है। प्राकृतिक गुफा रकामाड़ा, जनजातियों के आस्था का प्रतीक दूल्हा -
दुल्हन पर्वत बनरई बांध, श्याम धनुघुट्टा के बांध।
5. मेहता प्वाइंट - यहां पर झरने व जलप्रपात हैं जो सरगुजा और
रायगढ़ की सीमा बनाती है।
6. देव प्रवाह झरना - पहाड़ी नाला से निर्मित झरना।
7. गुफाएँ - बंदरकोट, रकामाड़ा, भालू माड़ा, झील गुफा, पैगा गुफा।
8. एडवेंचर जोन - परपटिया, मालतीपुरी।
9. पर्यटन परिपथ - परपटिया नान दमाली ट्रेकिंग, इको बाटनिकल ट्रेल,
मेडिको बाटनिकल ट्रेल (मछली नदी), मेडिसिनल ट्रेल मालतीपुर।
10. सांस्कृतिक वैभव - ट्राईवल विलेज अवगवां, तिब्बती कैंप
11. जन आस्था - बौद्ध मठ, काली मंदिर, बंजारी मंदिर, जंगलेश्वर
मंदिर, पनही पखना, दूल्हा - दुल्हिन।
12. घाटियाँ - कदनई, करदन, सकरिया, गोविंदपुर, पैगा।
महेशपुर
रिहन्द नदी के तट पर स्थित पुरातात्विक स्थल है। यहां पर निम्नलिखित साक्ष्य
प्राप्त हैं -
1. प्राचीन शिव मंदिर
2. 'कुड़िया - झोरी - मोड़ी' - इस स्थल पर 10 वीं शताब्दी में
निर्मित दो विशाल विष्णु मंदिर स्थित है, किंतु वर्तमान समय में ये भग्न अवस्था
में है।
3. ऋषभनाथ तीर्थकर - 8 वीं शताब्दी में निर्मित जैन तीर्थंकर
ऋषभनाथ की एक प्रतिमा अवस्थित है।
4. निशान पखना (देउरटीला) - कल्चुरीकालीन दो महत्वपूर्ण भग्नमंदिर
स्थित है।
रामगढ़ की पहाड़ी
यह सरगुजा में स्थित है। यह सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला का भाग है।
• खोजकर्ता - कर्नल आउसले (1848 ई.)
• किवदंती अनुसार कालिदास द्वारा मेघदूत की रचना रामगिरि की पहाड़ी में की गई है।
• रामगिरि की पहाड़ी सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है।
यहां निम्नलिखित प्रमुख पर्यटन स्थल हैं -
1. हाथी पोल गुफा
इस गुफा में विशाल सुरंग है जिसमें एक हाथी आसानी से गुजर सकता है इसलिए इसका नाम
हाथीपोल रखा गया है। इस गुफा के अंदर एक कुण्ड है। जिसे सीता कुण्ड के नाम से
जानते हैं।
2. सीताबेंगरा गुफा
• सीताबेंगरा का आशय सीता का निवास स्थान से है।
• जनश्रुति अनुसार कहा जाता है कि माता सीता प्रवास के दौरान इसी गुफा में रहती
थी।
• सीताबेंगरा की गुफा की रचना नाट्यशाला के रूप में किया गया है गुफा के बाहर
अर्द्ध चंद्राकर बेंचनुमा संरचना बना हुआ है।
• मेघदूतम के अनुसार प्रतिवर्ष आषाढ़ के प्रथम दिवस पर यहां सांस्कृतिक आयोजन हुआ
करते थे।
• गुफा की आंतरिक सुव्यवस्था को देखकर इसे विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला कहा जा
सकता है।
• जनश्रुति के अनुसार 200 ईसा पूर्व में भरतमुनि ने अपनी प्रसिद्ध रचना नाट्यशाला
की रचना की, इसका प्रमाण यहां पर उपस्थित मण्डप भरतमुनि द्वारा वर्णित नाट्य
मण्डप जैसी है।
3. जोगीमारा की गुफा
• यह गुफा रामगढ़ की पहाड़ी सरगुजा में स्थित है।
• यह गुफा सीताबेंगरा गुफा से सटी हुई है।
• यह नृत्यांगनाओं का विश्राम कक्ष था।
• इसे वरूण मंदिर भी कहा जाता है।
• यहां मौर्यकालीन अभिलेख प्राप्त हुए हैं, जिनकी भाषा पालि और लिपि ब्राह्मी है।
• यहां नर्तक देवदत और सुतनुका का प्रेम गाथा का वर्णन है।
• गुफा के अंदर चट्टानों को काटकर बनाई गई मानवीय आकृतियां हैं जो नाट्यकला से
संबंधित है।
4. तुर्रापानी
• सीताबेंगरा से आगे खड़ी चट्टानों में पानी की एक धारा बहती है जिसे तुर्रापानी
कहते हैं।
• यहां की मिट्टी लाल है।
• ऐसा कहा जाता है कि रामचन्द्र जी ने सीता जी के मस्तक पर इसी स्थल पर इसी
मिट्टी से तिलक लगाया था।
5. रावण दरवाजा
• यहां एक विशाल पत्थर को तराश कर दरवाजा बनाया गया है जिसे सिंह दरवाजा कहा गया
है। इसी के अंदर रावण दरवाजा, रावण की मूर्ति, कुंभकरण की मूर्ति, सीता जी एवं
हनुमान जी की प्रतिमा रखी हुई है।
6. लक्ष्मण बेंगरा की गुफा
7. रामगढ़ का किला
• यह किला तुर्रा के समीप स्थित है। जनश्रुति अनुसार मुनि वशिष्ट यहां तपस्या
करते थे इस कारण अंदर स्थित गुफा को वशिष्ट गुफा नाम दिया गया है।
अंबिकापुर
• छ.ग. का सबसे ठण्डा स्थान।
• मां महामाया मंदिर स्थित है।
• पहाड़ी कोरवा विकास प्राधिकरण का मुख्यालय।
• मां महामाया हवाई अड्डा दरिमा, अम्बिकापुर (राज्य शासन का स्वामित्व)
• केन्द्रीय जेल स्थित है।
• छत्तीसगढ़ में प्रथम बॉयोटेक पार्क की स्थापना की गई है।
• पंचमारा जलप्रपात
गुफाएं
• कैलाश गुफा
• आरा पहाड़ की गुफा, अम्बिकापुर
• लक्ष्मण गुफा
• झपिबेंगरा
• दरबार गुफा
अन्य पर्यटन स्थल
• तकिया - मजार - प्रसिद्ध पर्यटन स्थल तकिया - मजार अम्बिकापुर
में है। यहां बाबा मुराद शाह का मजार है ।
• ठिनठिनी पखना - अम्बिकापुर के समीप पत्थरों का एक समूह है जिसे
कठोर वस्तुओं से ठोंकने पर धातुओं के समान आवाज आता है।
• जलजली - यह एक भूकंपित क्षेत्र है।
• उल्टापानी - मैनपाट क्षेत्र में स्थित है। यहां पानी का बहाव
नीचे की तरफ न होकर ऊपर की ओर होती है।
• देवटिकरा - छेरिका देउर मंदिर है जो प्राचीनतम शिव मंदिर है।
• महारानीपुर - सीतापुर तहसील क्षेत्र अंतर्गत इस गांव में यह
प्राचीनतम मंदिर है जो वर्तमान में जीर्ण स्थिति में है।
• सतमहला मंदिर (कलचा - भदवाही) - यहां पंचायतन शैली में भगवान शिव
के मंदिर का अवशेष प्राप्त हुए हैं।
• पारदेश्वर शिव मंदिर
• पउरी - दरवाजा
• देवगढ़ - अर्धनारीश्वर शिव मंदिर
• लक्ष्मणगढ़ - पुरातात्विक स्थल
• घाटियां - कदनई, सकरिया, पैगा की घाट
केन्द्र संरक्षित स्मारक
1. सीता बेंगरा गुफा
2. जोगीमारा की गुफा
सरगुजा जिले में विशेष
• छत्तीसगढ़ के 14 देशी रियासतों में से एक सरगुजा रियासत है।
• कथा संयंत्र सरगुजा जिले में स्थित है।
• पाल यह एक भूआवेष्ठित जिला है।
• संविधान निर्मात्री सभा में सरगुजा रियासत से रायसाहब रघुराज सिंह शामिल हुए।
• रजवार भित्तिकला, दीवार अंकन कला सरगुजा क्षेत्र में विस्तृत है।
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